उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं और कुंठा को छिपाने के लिए देश में अस्थिरता और अव्यवस्था फैलाने से बाज नहीं आई, तो जनता उसका बचाखुचा राजनीतिक अस्तित्व भी पूरी तरह समाप्त कर देगी। उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी ऐतिहासिक गलतियों से सबक सीखने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बारबार कटघरे में खड़ा कर रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना बना राजनीतिक चरित्र
सीएम योगी ने विपक्षी दलों के दोहरे रवैये पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस किसी चुनाव में जीत हासिल करती है, तो उसे अपनी मेहनत और पुरुषार्थ बताती है, लेकिन जैसे ही जनता उसे नकारती है, वह तुरंत ईवीएम और भारत निर्वाचन आयोग पर ठीकरा फोड़ने लगती है। अदालतें जब मेरिट पर फैसले सुनाती हैं, तब भी न्यायपालिका पर सवाल उठाए जाते हैं। संवैधानिक संस्थाओं को गाली देना, उनकी साख पर हमला करना और सड़कों पर व्यवधान खड़ा करना कांग्रेस की स्थाई कार्यशैली बन चुकी है। लोकतांत्रिक मर्यादाओं का यह खुला उल्लंघन देश किसी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।
41 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की जनता ने किया था विदा
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सिमटते जनाधार का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रबुद्ध जनता ने कांग्रेस को 41 वर्ष पहले ही सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। वर्ष 1985 के बाद से पार्टी आज तक उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है। देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है और विकास व सुशासन की राजनीति को प्राथमिकता देती है। लगातार मिल रही चुनावी हार के कारणों पर आत्ममंथन करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने के षड्यंत्रों में जुटी रहती है, जिसे जनता देख रही है।
अकर्मण्य नेतृत्व को बदलने और आत्मचिंतन करने की सलाह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपना नेतृत्व बदलने की खरी सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिस शीर्ष नेतृत्व पर देश की जनता का तनिक भी भरोसा नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ने से खोई हुई जमीन वापस नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी को सड़कों पर अराजकता फैलाने और युवाओं को गुमराह करने के बजाय स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहिए। संसद और सार्वजनिक मंचों पर मेरिट व जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करना ही देश और स्वयं कांग्रेस के हित में होगा।



