मध्य प्रदेश में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सरकार और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है. सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान हटाए जाने के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन गुरुवार को भोपाल कूच तक पहुंच गया. करीब 5 हजार आदिवासी महिला, पुरुष और युवा न्याय की मांग लेकर पैदल भोपाल के लिए निकले. हालांकि, देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच हुई बैठक के बाद आंदोलनकारियों ने अपना मार्च स्थगित कर दिया.

इसके बाद आंदोलनकारी आधे रास्ते से लौटने के लिए राजी हो गए. मुख्यमंत्री आवास पर करीब एक घंटे चली बैठक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक के बाद प्रभावित परिवारों को जांच और न्याय का भरोसा दिया गया. प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों की सुरक्षित वापसी के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई.
12 आदिवासी परिवारों के मकान टूटने से शुरू हुआ विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई, जब कोसमी गांव में वन विभाग और वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के मकान हटाए गए. प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर रह रहे थे और खेती के जरिए अपने परिवार का भरणपोषण करते थे. कार्रवाई के दौरान उनके घरों के साथ फसलों को भी नुकसान पहुंचा. वहीं, वन विकास निगम का कहना है कि संबंधित जमीन पौधरोपण के लिए आवंटित आरक्षित वन क्षेत्र का हिस्सा है और वहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई.
निगम के मुताबिक, संबंधित लोगों को पहले नोटिस भी दिए गए थे. इस तरह मामला वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और आदिवासी परिवारों के आवास, आजीविका के साथ जमीन पर उनके दावों के बीच उलझ गया. कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने धरना शुरू कर दिया और न्याय की मांग उठाई.
शिवराज की नाराजगी के बाद बढ़ा सियासी तापमान
आदिवासी परिवारों के मकान टूटने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान कोसमी गांव पहुंचे थे. उन्होंने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे अन्याय बताया और सवाल उठाया कि बीजेपी को वोट देने वाले आदिवासी परिवारों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया. शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की. उन्होंने यह आशंका भी जताई कि अधिकारियों की कार्रवाई से मुख्यमंत्री मोहन यादव और सरकार की छवि को नुकसान पहुंच सकता है.
इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब कर मामले की जांच कराने की बात कही. शिवराज की सार्वजनिक नाराजगी के बाद बीजेपी के भीतर दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हुईं. हालांकि, पार्टी की ओर से किसी आंतरिक विवाद की बात से इनकार किया गया.
पांच दिन के धरने के बाद भोपाल कूच
कोसमी गांव में कई दिनों तक धरना देने के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर आदिवासी समाज ने भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया. गुरुवार सुबह करीब 5 हजार लोगों ने पदयात्रा शुरू की. इसमें आदिवासी महिला, पुरुष और युवा शामिल थे. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें थीं कि प्रभावित परिवारों को न्याय मिले, जमीन से जुड़े उनके दावों की जांच की जाए, मकानों और फसलों को हुए नुकसान की भरपाई तथा पुनर्वास पर फैसला हो और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए.
पदयात्रा के भोपाल की ओर बढ़ने के बीच मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर हो गया. इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान की बैठक हुई. बैठक में आदिवासी परिवारों की समस्याओं और आंदोलन को समाप्त कराने के रास्ते पर चर्चा हुई.
बैठक के बाद आंदोलन स्थगित, बसों से लौटे प्रदर्शनकारी
देर रात हुई बैठक के बाद सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को जांच और समाधान का भरोसा दिया गया. इसके बाद आदिवासी प्रतिनिधियों ने भोपाल मार्च स्थगित करने पर सहमति जताई. प्रदर्शनकारियों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन ने बसों की व्यवस्था की. फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से जांच और समाधान का भरोसा मिलने के बाद भोपाल मार्च स्थगित हो गया है.



