रामपुर बुशहर (शिमला)। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिवंगत राजा वीरभद्र सिंह की प्रतिमा अब उनकी जन्मभूमि सराहन में भी स्थापित की जाएगी। शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर प्रतिमा स्थापित होने के बाद अब मां भीमाकाली मंदिर परिसर में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर रामपुर और सराहन क्षेत्र में खासा उत्साह है।

 

लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि सराहन में प्रतिमा स्थापित करने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, सराहन वीरभद्र सिंह की जन्मभूमि है और दूसरा, मां भीमाकाली के प्रति उनकी गहरी आस्था रही है। ऐसे में मंदिर परिसर में प्रतिमा स्थापना का निर्णय उनके जीवन से जुड़े इन दोनों महत्वपूर्ण पहलुओं को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।

18 अक्टूबर को होगा प्रतिमा का अनावरण

दिवंगत राजा वीरभद्र सिंह की जन्मभूमि सराहन में 18 अक्टूबर को उनकी प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विदित कुमार चौधरी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी रामपुर के अध्यक्ष ने बताया कि समारोह में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, ठियोग विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुलदीप राठौर और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने की संभावना है।

 

जन्मभूमि से रहा गहरा नाता, मां भीमाकाली के थे परम भक्त

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सराहन का वीरभद्र सिंह के जीवन में विशेष स्थान रहा है। उनका जन्म इसी ऐतिहासिक क्षेत्र में हुआ था और यहां से उनका भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बना रहा। क्षेत्र के लोगों की भी लंबे समय से इच्छा थी कि उनकी जन्मभूमि पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और स्मृतियों से जुड़ी रह सकें।

 

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह मां भीमाकाली के परम भक्त थे और देवी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा थी। सराहन स्थित मां भीमाकाली मंदिर बुशहर रियासत की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल पर प्रतिमा स्थापित करने से उनकी जन्मभूमि और आराध्य देवी के साथ जुड़ी स्मृतियों को स्थायी पहचान मिलेगी।

 

54 पंचायतों से जुटाई गई मिट्टी

सराहन में प्रतिमा स्थापना कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसके लिए रामपुर उपमंडल की सभी 54 पंचायतों से मिट्टी एकत्रित की गई है। इस पहल को क्षेत्र के लोगों की भागीदारी और वीरभद्र सिंह के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। प्रतिमा स्थापना से पहले कलश यात्रा भी निकाली गई थी।

 

 

आयोजन समिति के अध्यक्ष राहुल सोनी सहित अन्य पदाधिकारी कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हैं। इस अवसर पर प्रदेश के मंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों से लोगों के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 10 हजार लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में लोगों की संभावित भागीदारी को देखते हुए आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।

रिज पर पहले हो चुका है प्रतिमा का अनावरण

शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण करीब एक वर्ष पहले किया गया था। उस कार्यक्रम में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे। अब सराहन में प्रतिमा स्थापित होने से उनकी स्मृतियां उनकी जन्मस्थली से भी जुड़ेंगी। विक्रमादित्य सिंह के अनुसार सराहन में प्रतिमा स्थापना केवल एक स्मारक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही भावना को सम्मान देने का प्रयास भी है।

 

छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह

वीरभद्र सिंह का हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबा और महत्वपूर्ण योगदान रहा। 23 जून 1934 को सराहन में जन्मे वीरभद्र सिंह छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और दशकों तक राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उनका निधन 8 जुलाई 2021 को हुआ था।

कल सराहन पहुंचेंगे कांग्रेस के कई दिग्गज नेता

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विदित कुमार चौधरी के दौरा कार्यक्रम के अनुसार, वह 18 अक्टूबर को सुबह 9 बजे नारकंडा से रवाना होकर सुबह 11:30 बजे सराहन पहुंचेंगे। यहां वह पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण समारोह में भाग लेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे सराहन से शिमला के लिए रवाना होंगे। समारोह में वरिष्ठ नेताओं की संभावित भागीदारी और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के अनुमान को देखते हुए आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यह कार्यक्रम वीरभद्र सिंह के राजनीतिक योगदान, बुशहर क्षेत्र से उनके जुड़ाव और उनकी स्मृतियों को सम्मान देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।