आज के दौर में ₹20 लाख के बजट में एक से बढ़कर एक शानदार एसयूवी बाजार में मौजूद हैं. महिंद्रा थार जैसी गाड़ियों का क्रेज तो इन दिनों चरम पर है. हर मध्यमवर्गीय परिवार का सपना होता है कि उनके आंगन में भी एक नई चमचमाती कार खड़ी हो. लेकिन, बिना सही वित्तीय योजना के लिया गया बड़ा कार लोन आपकी गाढ़ी कमाई पर भारी पड़ सकता है और महीने के बजट को बुरी तरह बिगाड़ सकता है. अगर आप भी 20 लाख रुपये की कार खरीदने का मन बना चुके हैं, तो फाइनेंस की दुनिया का सुपरहिट ’20410′ फॉर्मूला आपके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है. यह नियम बताता है कि आपको कार के लिए कितनी डाउन पेमेंट देनी चाहिए, लोन कितने सालों का होना चाहिए तथा आपकी ईएमआई का गणित क्या होना चाहिए, जिससे आपकी जेब पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.

क्या है ’20410′ का सुपरहिट फॉर्मूला?

वित्तीय विशेषज्ञ हमेशा कार खरीदने से पहले एक ठोस प्लानिंग की सलाह देते हैं. यह नियम सुनिश्चित करता है कि कार का शौक आपके घर के राशन, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट फंड को प्रभावित न करे. इस फॉर्मूले को तीन आसान हिस्सों में बांटा गया है.

  1. पहला हिस्सा : कार की ऑनरोड कीमत का कम से कम 20 फीसदी हिस्सा आपको अपनी जेब से नकद डाउन पेमेंट के रूप में देना चाहिए.
  2. दूसरा हिस्सा : कार लोन की मियाद अधिकतम 4 साल होनी चाहिए.
  3. तीसरा हिस्सा : कार की मासिक ईएमआई के साथसाथ मेंटेनेंस का खर्च आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

समझिए 20 लाख की कार का पूरा कैलकुलेशन

मान लीजिए आप 20 लाख रुपये की ऑनरोड कीमत वाली कार फाइनल करते हैं. नियम के मुताबिक आपको इसका 20 फीसदी यानी ₹4,00,000 डाउन पेमेंट के तौर पर देना होगा. ऐसा करने से आपका लोन अमाउंट घटकर ₹16,00,000 रह जाएगा. कम लोन राशि होने पर बैंक आसानी से बेहतर ब्याज दर पर कर्ज दे देते हैं.

अब अगर बैंक 9 फीसदी की सालाना ब्याज दर से आपको लोन देता है, तो 4 साल की अवधि के लिए आपकी ईएमआई लगभग ₹39,811 बनेगी. इस दौरान आप बैंक को ₹3,11,000 का ब्याज चुकाएंगे. अगर आप ईएमआई कम करने के लालच में 7 साल का लोन लेते हैं, तो ईएमआई भले ही ₹25,720 हो जाए, लेकिन ब्याज के रूप में आपको ₹5.60 लाख भरने पड़ेंगे. 4 साल के लोन में आप सीधे तौर पर करीब 2.5 लाख रुपये का ब्याज बचा सकते हैं.

कम सैलरी वाले कैसे पूरा करें अपना सपना?

अब सवाल उठता है कि इतनी ईएमआई चुकाने के लिए सैलरी कितनी होनी चाहिए. फॉर्मूले के तीसरे नियम के अनुसार, लगभग ₹40,000 की ईएमआई वहन करने के लिए आपकी इनहैंड सैलरी ₹4 लाख प्रति माह होनी चाहिए.

यदि आपकी मासिक आय ₹1.5 लाख से ₹2 लाख के बीच है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है. इसके लिए आप डाउन पेमेंट की राशि को 20 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर सकते हैं. यानी ₹10 लाख खुद जमा करें. इससे लोन केवल ₹10 लाख का बचेगा. दूसरा विकल्प यह है कि बजट को संतुलित करने के लिए लोन की अवधि को 4 साल की बजाय अधिकतम 5 साल कर लें. इससे आपकी ईएमआई घटकर ₹33,212 हो जाएगी.

बजट में इन छिपे हुए खर्चों को न करें नजरअंदाज

अक्सर लोग कार खरीदते वक्त केवल ईएमआई का ही हिसाब लगाते हैं. एक वाहन के साथ कई अन्य खर्चे भी जुड़े होते हैं. गाड़ी में डलने वाले पेट्रोलडीजल या चार्जिंग का खर्च, हर 6 महीने में होने वाली सर्विसिंग आपकी जेब ढीली करती है. इसके अलावा ₹20 लाख की कार के लिए हर साल ₹30,000 से ₹50,000 तक का बीमा प्रीमियम भी भरना पड़ता है. अपनी वित्तीय प्लानिंग करते समय इन ‘छिपे हुए खर्चों’ को बजट में शामिल करना बेहद जरूरी है. सही योजना ही आपको आर्थिक तंगी से बचा सकती है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.