प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित हजारों करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन और गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनी एम/एस ईकॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके एक निदेशक के ठिकानों पर छापेमारी की.

ईडी के अनुसार, 7 जुलाई को हुई इस कार्रवाई में कई अहम दस्तावेज, अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य सबूत बरामद किए गए हैं. जांच के दौरान ऐसे लेनदेन और संपत्तियों के भी प्रमाण मिले हैं, जिनका संबंध रिलायंस अनिल अंबानी समूह से बताया जा रहा है.

क्या है मामला

ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर चल रही है. ये एफआईआर विभिन्न बैंकों, जिनमें यस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं, की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं. जांच एजेंसी का दावा है कि RHFL और RCFL ने जनता का हजारों करोड़ रुपये का पैसा जुटाया, जिसे बाद में शेल कंपनियों और समूह से जुड़ी अन्य कंपनियों के जरिए व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह भेज दिया गया. ईडी के मुताबिक, इन कंपनियों को बिना पर्याप्त जांचपड़ताल, जरूरी दस्तावेज और भुगतान क्षमता का आकलन किए बड़ेबड़े कॉरपोरेट लोन दिए गए. इनमें से कई कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और उनके पास कारोबार या कर्ज चुकाने की क्षमता नहीं थी.

अब तक 4,510 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

ईडी का यह भी कहना है कि इन शेल कंपनियों के निदेशक रिलायंस अनिल अंबानी समूह के कर्मचारी या करीबी सहयोगी थे और उनके बैंक खाते व खातों का संचालन समूह की प्रमुख कंपनियों के अधिकारियों द्वारा किया जाता था. जांच में अब तक 15,548 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय का पता लगाया गया है. ईडी अब तक 4,510 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी है, जिनमें से 3,926 करोड़ रुपये की अटैचमेंट को निर्णायक प्राधिकरण से मंजूरी भी मिल चुकी है. इस मामले में ईडी पहले ही रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक Amitabh Jhunjhunwala और पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी Amit Bapna को 15 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार कर चुकी है. दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. ईडी ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी.