पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ने वन विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यमुना नदी से रेत ले जाने वाले दो ट्रैक्टरों को जब्त करने की धमकी देकर उनके चालकों से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता विभाग की टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान भगानी में तैनात वन विभाग के रेंज अधिकारी (आरओ) सुमंत के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने रेत ले जाने के मामले में दो ट्रैक्टर जब्त करने की बात कहकर शिकायतकर्ता से पैसों की मांग की थी। चंद हजार रुपये के लालच में कानून की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ट्रैक्टर जब्त करने की धमकी देकर मांगे 10 हजार रुपये
मामले के अनुसार, भगानी गांव के निवासी इकराम पुत्र इकबाल ने विजिलेंस के पास शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वन विभाग के आरओ सुमंत ने उसके बहनोई जुल्फान को यमुना नदी से रेत ले जाने के मामले में दो ट्रैक्टर जब्त करने की धमकी दी थी। आरोप है कि इस कार्रवाई से बचाने के बदले अधिकारी ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ने आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई।
विजिलेंस ने बिछाया जाल, रिश्वत लेते ही दबोचा
पुलिस अधीक्षक विजिलेंस एनके शर्मा के अनुसार, 3 नवंबर को पुलिस थाना राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी), नाहन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद निरीक्षक मनोज कुमार की अगुवाई में विजिलेंस टीम ने पांवटा साहिब में कार्रवाई के लिए जाल बिछाया। टीम ने पूरी योजना के तहत आरोपी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जारी
एसपी विजिलेंस एनके शर्मा ने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है। विजिलेंस टीम यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं में क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल वन विभाग के आरओ की गिरफ्तारी ने एक बार फिर सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत को उजागर किया है।



