असेसमेंट ईयर 202627 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया पूरे जोरों पर है. यदि आपने भी भारतीय रिजर्व बैंक की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में निवेश किया है और उससे कमाई की है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. कई टैक्सपेयर्स ITR दाखिल करते समय SGB से होने वाली आय को सही तरीके से रिपोर्ट नहीं करते हैं, जिसके कारण उन्हें बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से टैक्स नोटिस का सामना करना पड़ता है. आइए जानते हैं कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स के नियम क्या हैं और आपको अपने रिटर्न में इसे कैसे दिखाना है.

SGB से होने वाली कमाई: दो हिस्सों में समझें टैक्स का नियम
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से निवेशकों को दो तरह से कमाई होती है—पहला, सालाना मिलने वाला ब्याज और दूसरा, बॉन्ड की कीमत बढ़ने पर मिलने वाला कैपिटल गेन . इन दोनों पर टैक्स के नियम पूरी तरह अलग हैं:
1. सालाना मिलने वाले ब्याज पर टैक्स
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर निवेशकों को 2.5 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिलता है, जो साल में दो बार सीधे आपके बैंक खाते में जमा किया जाता है.
- टैक्स नियम: यह ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है. यह आपकी सालाना आय में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर टैक्स लगता है.
- ITR में कहां दिखाएं: इसे ITR फॉर्म में ‘Income from Other Sources’ के हेड के तहत घोषित करना अनिवार्य है.
- महत्वपूर्ण बात: आरबीआई इस ब्याज पर कोई TDS नहीं काटता है, इसलिए कई निवेशक इसे रिटर्न में दिखाना भूल जाते हैं. यह एक बड़ी गलती है क्योंकि यह ट्रांजैक्शन आपके AIS में दर्ज होता है.
2. मैच्योरिटी और कैपिटल गेन्स पर टैक्स
टैक्स के लिहाज से SGB को सबसे बेहतरीन निवेश माना जाता है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें हैं:
- 8 साल की मैच्योरिटी पर: यदि आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को पूरे 8 साल की मैच्योरिटी अवधि तक अपने पास रखते हैं, तो रिडेम्पशन के समय मिलने वाला पूरा मुनाफा 100% टैक्सफ्री होता है. इस पर आपको 1 रुपए भी टैक्स नहीं देना होता.
- साल बाद प्रीमैच्योर रिडेम्पशन: 5 साल के बाद आरबीआई के साथ सीधे प्रीमैच्योर रिडेम्पशन करने पर भी व्यक्तिगत निवेशकों को कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती है.
- स्टॉक एक्सचेंज पर बिक्री: यदि आप 8 साल पूरे होने से पहले अपने SGB को स्टॉक एक्सचेंज पर बेचते हैं, तो यह मुनाफा टैक्सफ्री नहीं होगा. होल्डिंग पीरियड के आधार पर इस पर शॉर्टटर्म या लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा.
SGB से हुई इनकम की जानकारी कैसे दें
SGB से जुड़े सभी ट्रांजैक्शन की जानकारी, मामले के आधार पर, ITR2, ITR3 या ITR4 में दिए गए संबंधित शेड्यूल में देनी होगी. SGB पर मिलने वाला सालाना 2.5 फीसदी ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल है और इसकी जानकारी ‘Schedule OS’ में देनी होगी.
इस ब्याज पर निवेशक के लागू इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. चूंकि सरकारी सिक्योरिटीज को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 193 के तहत TDS से छूट मिली हुई है, इसलिए इस ब्याज पर स्रोत पर कोई टैक्स नहीं काटा जाएगा.
कैपिटल गेन्स की जानकारी देना इस बात पर निर्भर करता है कि बॉन्ड को कैसे बेचा या भुनाया गया है. अगर ओरिजिनल सब्सक्राइबर मैच्योरिटी पर रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पास बॉन्ड को रिडीम करता है, तो असेसमेंट ईयर 202627 के लिए लागू नियमों के तहत कैपिटल गेन्स पर टैक्स नहीं लगेगा.
ITR फाइल करते समय भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां
- AIS और TIS को क्रॉसचेक न करना : रिटर्न भरने से पहले अपना Annual Information Statement जरूर डाउनलोड करें. आरबीआई द्वारा आपको दिया गया ब्याज इसमें पहले से दिखाई देता है. अगर आपके ITR और AIS के आंकड़ों में अंतर मिला, तो ऑटोमैटिक नोटिस आ सकता है.
- एक्सचेंज पर बेचे गए बॉन्ड को छुपाना : अगर आपने शेयर बाजार के जरिए SGB को मैच्योरिटी से पहले बेचा है, तो उसे आईटीआर में ‘Capital Gains’ शेड्यूल के तहत दर्ज करें. लिस्टेड सिक्योरिटीज के नियमों के अनुसार उचित इंडेक्सेशन या टैक्स रेट का लाभ लेते हुए इसकी गणना करें.
- टैक्सफ्री मैच्योरिटी अमाउंट को न दिखाना : भले ही 8 साल पूरे होने पर मिला पैसा पूरी तरह टैक्सफ्री है, फिर भी इसे आईटीआर के ‘Exempt Income’ वाले शेड्यूल में रिपोर्ट करना चाहिए ताकि आपकी कुल संपत्ति और कमाई का सही ब्योरा विभाग के पास रहे.
नियमों का जरूर करें पालन
डिजिटल ट्रैकिंग के इस दौर में आयकर विभाग के पास आपके हर वित्तीय लेनदेन की सटीक जानकारी होती है. इसलिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से मिले ब्याज को ‘Income from Other Sources’ में दिखाकर और मैच्योरिटी के मुनाफे को नियमानुसार रिपोर्ट करके आप किसी भी तरह के टैक्स झंझट और पेनाल्टी से बच सकते हैं. यदि आपके पास एक से अधिक बॉन्ड सीरीज हैं, तो बेहतर होगा कि फाइलिंग से पहले अपने बैंक स्टेटमेंट और SGB होल्डिंग सर्टिफिकेट का मिलान कर लें.
बजट 2026 के बदलाव अगले साल से लागू होंगे
2026 के बजट में एक अहम बदलाव यह है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन्स में छूट सिर्फ ‘ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स’ को ही मिलेगी, जिन्होंने RBI द्वारा जारी किए जाने के समय बॉन्ड खरीदे या उनमें निवेश किया था और मैच्योरिटी तक उन्हें अपने पास रखा था.
इसके अलावा, जिन निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट से SGBs खरीदे हैं, उन्हें अब यह छूट नहीं मिलेगी. नतीजतन, ऐसे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के रिडेम्पशन से होने वाला कोई भी फ़ायदा टैक्सेबल होगा और उसे शेड्यूल कैपिटल गेन्स के तहत रिपोर्ट करना होगा.
हालांकि, ये बदलाव सिर्फ असेसमेंट ईयर 202728 से लागू होंगे, जब नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 पूरी तरह से लागू हो जाएगा. सही शेड्यूल के तहत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के ब्याज और कैपिटल गेन्स की रिपोर्टिंग करने से सही टैक्स फाइलिंग सुनिश्चित करने और बेवजह के नोटिस व कानूनी पेचीदगियों से बचने में मदद मिलेगी.


