शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है. देश के गैस ट्रेडिंग सेक्टर की सबसे बड़ी और प्रमुख कंपनी ‘इंडियन गैस एक्सचेंज’ जल्द ही अपना आईपीओ लाने जा रही है. कंपनी ने बाजार नियामक संस्था सेबी के पास अपने ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं. इस कदम के साथ ही कंपनी ने शेयर बाजार में अपनी धाक जमाने की पूरी तैयारी कर ली है. अगर आप भी शेयर बाजार में दांव लगाने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस इश्यू में क्या खास है और इसके पीछे कंपनी की असल रणनीति क्या है.

पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा इश्यू
इस आईपीओ की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा. इसका सीधा मतलब यह है कि इस आईपीओ के जरिए बाजार में कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे और न ही कंपनी के खाते में कोई नई पूंजी आएगी. इसमें IGX की प्रमोटर कंपनी, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेचेगी. ड्राफ्ट पेपर्स के मुताबिक, IEX 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 1.67 करोड़ इक्विटी शेयर बाजार में उतारेगी. इन शेयरों को बेचकर जो भी रकम मिलेगी, वह सीधे प्रमोटर कंपनी IEX के पास जाएगी. फिलहाल, यह आईपीओ किस दिन खुलेगा और इसकी प्राइस बैंड क्या होगी, इसका आधिकारिक एलान होना बाकी है.
प्रमोटर कंपनी क्यों घटा रही है अपनी हिस्सेदारी?
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब कारोबार अच्छा चल रहा है, तो प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी क्यों बेच रहे हैं? दरअसल, इसके पीछे एक जरूरी रेगुलेटरी नियम है. मौजूदा समय में IGX के अंदर IEX की 47.28 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है. लेकिन, ‘गैस एक्सचेंज रेगुलेशन 2020’ के नियमों के मुताबिक, इसे घटाकर 25 प्रतिशत तक लाना अनिवार्य है. इसी कानूनी नियम का पालन करने के लिए IEX यह कदम उठा रही है. हालांकि, शेयर बेचने के बावजूद IEX की कंपनी में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनी रहेगी और भविष्य के अहम फैसलों में उसका प्रभाव जारी रहेगा.
बाजार में लिस्ट होने के पीछे कंपनी का मास्टरप्लान
भले ही इस आईपीओ से IGX को सीधे तौर पर कोई नया फंड न मिल रहा हो, लेकिन शेयर बाजार में लिस्ट होने के अपने कई बड़े फायदे हैं. कंपनी का मुख्य लक्ष्य बाजार में अपनी साख और पहचान को और मजबूत करना है. शेयर बाजार में लिस्ट होने से आम निवेशकों और बड़े ग्राहकों के बीच कंपनी की ब्रांड वैल्यू के साथसाथ पारदर्शिता भी बढ़ेगी. यह कदम कंपनी को भविष्य में अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने और एक मजबूत आधार तैयार करने में बड़ी मदद करेगा.
निवेश से पहले जान लें खतरे
शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले हर जोखिम को समझना सबसे समझदारी का काम है. कंपनी ने अपने DRHP में साफ तौर पर कई चुनौतियों का जिक्र किया है. IGX का पूरा बिजनेस मॉडल गैस ट्रेडिंग के वॉल्यूम पर टिका हुआ है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। अगर भविष्य में एक्सचेंज पर ट्रेडिंग वॉल्यूम घटता है, तो कंपनी की कमाई पर इसका सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा.
इसके अलावा, नेचुरल गैस की सप्लाई में होने वाली कोई भी रुकावट, पाइपलाइन नेटवर्क की उपलब्धता में कमी और सरकारी नीतियों में अचानक होने वाले बदलाव कारोबार की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं. कंपनी को रेगुलेटरी नियमों का सख्ती से पालन करना होता है; किसी भी नियम के उल्लंघन से इसका कामकाज और कैश फ्लो बिगड़ सकता है. साथ ही, कंपनी की आमदनी कुछ गिनेचुने बड़े ग्राहकों और थर्ड पार्टी सेवाओं पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर साबित हो सकता है.



