Noida News: नोएडा के थाना फेस3 क्षेत्र के सेक्टर66 स्थित ममूरा में हुए भीषण अग्निकांड ने दर्जनों परिवारों की जिंदगी पलभर में बदल दी. आग की लपटों ने सिर्फ एक इमारत को नहीं, बल्कि लोगों के वर्षों की मेहनत, सपनों और आशियाने को भी राख में तब्दील कर दिया. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका जिला अस्पताल में इलाज जारी है. वहीं फायर विभाग, पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी से 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिनका सब कुछ जल गया, वे आखिर जाएं तो जाएं कहां?

राख में बदला आशियाना, आंखों में दर्द और बेबसी
अग्निकांड के बाद जब टीवी9 डिजिटल ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की गई तो हर किसी की आंखों में दर्द और बेबसी साफ दिखाई दी. किसी का घर का पूरा सामान जलकर राख हो गया तो किसी के बच्चों की पढ़ाई से जुड़े दस्तावेज, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मार्कशीट और अन्य जरूरी कागजात आग की भेंट चढ़ गए. किराए पर रहने वाले कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे आने की स्थिति में हैं. उनका कहना है कि न रहने के लिए घर बचा और न ही दोबारा जिंदगी शुरू करने का कोई सहारा.
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संकरी गलियां बनीं राहत कार्य की सबसे बड़ी चुनौती
स्थानीय लोगों का कहना है कि ममूरा की संकरी गलियों में वर्षों से बिना पर्याप्त फायर सेफ्टी इंतजाम के बहुमंजिला इमारतें खड़ी होती रही हैं. इलाके में अतिक्रमण इतना अधिक है कि आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी आसानी से अंदर नहीं पहुंच पातीं. इस कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं. लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन कराया जाता और नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट होता तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता.
100 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, 2 की मौत
हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं. संकरी गलियों के बावजूद टीमों ने वैकल्पिक रास्तों और सीढ़ियों की मदद से इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकाला. करीब 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया. हालांकि आग की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए और उनका इलाज जारी है.
2 के खिलाफ मुकदमा दर्ज, जांच शुरू
मामले में थाना फेस3 पुलिस ने इमारत के अकाउंटेंट शिवालिक और बिल्डिंग को लीज पर लेने वाले कृष्ण कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस दोनों की भूमिका की जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इमारत में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
हादसे के बाद प्रशासन ने प्रभावित इमारत को पूरी तरह खाली कराकर सील कर दिया है. फायर विभाग और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच कर रही हैं. इसके साथ ही निर्माण की वैधता, फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है. यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
फायर सेफ्टी पर फिर खड़े हुए बड़े सवाल
ममूरा अग्निकांड ने एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में बनी बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इससे पहले भी कई बड़े शहरों में आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर हादसे के बाद केवल जांच और नोटिस तक कार्रवाई सीमित रह जाती है. अब लोगों की नजर नोएडा प्राधिकरण और फायर विभाग पर है कि क्या अवैध निर्माण, संकरी गलियों और बिना फायर सेफ्टी वाली इमारतों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा या फिर यह हादसा भी समय के साथ भुला दिया जाएगा.



