CJP Protest SC Hearing: NEET UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताए कि जांच कहां तक पहुंची है और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार और CJP के बीच आज दूसरी दौर की बातचीत हुई.

सरकारCJP वार्ता में कुछ मुद्दों पर बनी सहमति
पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार और CJP के बीच दूसरे दौर की बातचीत के बाद CJP ने बैठक की जानकारी साझा की। संगठन का दावा है कि सरकार ने उनकी मांगों पर जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। अब दोनों पक्षों के बीच कल फिर बैठक होगी। बैठक के बाद CJP ने बताया कि उसने सरकार के सामने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग दोहराई। इसके अलावा, पेपर लीक से जुड़े घटनाक्रम के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा, प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और छात्रों पर कोई कार्रवाई न करने की मांग भी रखी गई।
CJP और सरकार की बातचीत
सीजेपी और सरकार के बीच हुई 10 मिनट की बातचीत में तीन में से दो पर सरकार विचार करेगी। CJP ने अपने जारी बयान में कहा है कि अभी सिर्फ दो मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं हुआ है। हमने पीड़ितों के परिजनों को एक करोड़ मुआवजे की मांग रखी है। साथ ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए कल 25 जुलाई तक का समय दिया है। शनिवार को सरकार से फिर मुलाकात होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पूरे साल इस मामले की निगरानी करेगा और केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि पेपर लीक की जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या तैयारी की जा रही है। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। अदालत ने साफ किया कि हलफनामा मिलने के बाद मामले की समीक्षा की जाएगी।
सरकार और CJP के बीच आज दूसरी बैठक
उधर, पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार और CJP के बीच आज दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दूसरी बार बातचीत होगी। इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर हुई बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। सरकार का कहना है कि उसने CJP को चार बार बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन संगठन ने सरकारी आवास पर मिलने से इनकार कर दिया और किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता की मांग की थी। इसी के बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक तय हुई। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
इस बीच, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह देर रात मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। हालांकि, CJP ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार आंदोलन के दबाव में है और जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की तैयारी
पेपर लीक मामलों में तेजी से सुनवाई के लिए सरकार ने भी कदम बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात कहा कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में पेपर लीक मामलों की जांच और सुनवाई के लिए नागपुर और औरंगाबाद में दो फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आदेश दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी, केंद्र के हलफनामे और सरकारCJP वार्ता के नतीजों पर इस पूरे मामले की अगली दिशा तय होगी।
CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टों का किया खंडन
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका की सुनवाई से इनकार करने संबंधी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह गलत बताया। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी, इसलिए सुनवाई का सवाल ही नहीं उठता। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुबह 10 बजे तक अदालत में इस मामले से जुड़ा एक भी दस्तावेज या रिट याचिका दाखिल नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि केवल एक प्रतिनिधित्व भेजा गया था, जिसे कानूनी तौर पर रिट याचिका नहीं माना जा सकता।
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उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, मैं किसी प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं?
मुख्य न्यायाधीश ने उन वकीलों पर भी नाराजगी जताई जो औपचारिक याचिका दाखिल किए बिना ही अदालत से तत्काल सुनवाई की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है और बिना याचिका दाखिल किए मामले को सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता। साथ ही CJI ने मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से यह गलत प्रचार किया गया कि उन्होंने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, जबकि वास्तविकता यह है कि अदालत के समक्ष कोई विधिवत याचिका थी ही नहीं। उन्होंने तथ्य जांचे बिना ऐसी खबरें प्रकाशित और प्रसारित करने को गैरजिम्मेदाराना और लापरवाहीपूर्ण पत्रकारिता बताया।
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