देश के सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक ने चालू वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन का भरोसा जताया है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अशोक चंद्रा का कहना है कि अगर मौजूदा रफ्तार जारी रही, तो इस वित्त वर्ष बैंक का नेट प्रॉफिट 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. पिछले वित्त वर्ष में PNB ने 16,904 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया था. वहीं अब बैंक को उम्मीद है कि इस बार यह आंकड़ा नया रिकॉर्ड बनाएगा.

हर तिमाही 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मुनाफे का लक्ष्य
अशोक चंद्रा ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से बैंक लगातार हर तिमाही 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रहा है. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी यही रुझान देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि बैंक की कोशिश है कि आने वाली हर तिमाही में मुनाफा बढ़े और नए रिकॉर्ड बनें. इसी आधार पर उन्हें पूरा भरोसा है कि पूरे साल का मुनाफा 20,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है.
किन क्षेत्रों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?
PNB इस साल अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए कई क्षेत्रों पर खास ध्यान दे रहा है. बैंक का फोकस मुख्य रूप से रिटेल लोन, कृषि , MSME सेक्टर और स्वयं सहायता समूह पर रहेगा. बैंक का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष लोन में 1213% की बढ़ोतरी होगी, जबकि जमा 910% तक बढ़ सकती है.
नए बिजनेस में भी करेगा एंट्री
PNB इस साल एक नए कारोबार Acquisition Finance में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है. यह ऐसी फाइनेंसिंग होती है, जिसमें किसी कंपनी के अधिग्रहण के लिए बैंक लोन देता है. RBI ने हाल ही में इस तरह की फाइनेंसिंग के नियमों में बदलाव करते हुए बैंकों को राहत दी है. इसके बाद PNB ने अपनी बोर्ड बैठक में इस नीति को मंजूरी दे दी है. अशोक चंद्रा के मुताबिक, बैंक फिलहाल एक अच्छे पार्टनर की तलाश कर रहा है और चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से इस कारोबार की शुरुआत की जा सकती है. शुरुआत में यह सुविधा भारत की घरेलू कंपनियों को दी जाएगी.
RBI के नए नियम क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में अधिग्रहण फाइनेंस से जुड़े नए नियम लागू किए हैं. नए नियमों के तहत बैंक अब किसी डील की 75% तक फंडिंग कर सकते हैं, जबकि पहले प्रस्तावित सीमा 70% थी. हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं. जैसे उधार लेने वाली कंपनी की कम से कम 500 करोड़ रुपये की नेटवर्थ होनी चाहिए, पिछले तीन साल से लगातार मुनाफा होना चाहिए और अधिग्रहण के बाद कंपनी का डेटटूइक्विटी अनुपात 3:1 से अधिक नहीं होना चाहिए.



