अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और पश्चिम एशिया में अमेरिकाईरान के बीच तनाव घटने से सोमवार को रुपया 61 पैसे की मजबूत बढ़त के साथ 95.92 प्रति डॉलर आ गया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू शेयर बाजार में मजबूती और प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में कमजोरी ने भी रुपये को सपोर्ट किया.

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 96.18 के स्तर पर खुला. कारोबार के दौरान यह 96.27 के निचले स्तर तक गया, जबकि 95.78 के उच्च स्तर को भी छुआ. आखिर में रुपया 95.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इसके पहले शुक्रवार को रुपया 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. यानी एक ही कारोबारी दिन में भारतीय मुद्रा में 61 पैसे की मजबूती दर्ज की गई.।

क्यों मजबूत हुआ रुपया?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बना है. इससे कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई. इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स भी करीब 0.20% गिरकर 101.09 पर आ गया. इसका मतलब है कि दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर कमजोर हुआ, जिसका फायदा रुपये को मिला. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप की उम्मीद ने भी रुपये को मजबूत बनाए रखने में मदद की. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।

कच्चा तेल हुआ सस्ता

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में लगभग 9% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद इसकी कीमत 88.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसलिए जब तेल सस्ता होता है तो देश का आयात खर्च घटता है और इसका सकारात्मक असर रुपये पर देखने को मिलता है.