Yoga And Pregnancy: योग शब्द संस्कृत के युज शब्द से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना या एक करना। योग का काम मन, शरीर और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करना है। योग हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करता है। योग कई सारी शारीरिक और मानसिक समस्याओं में अहम भूमिका निभाता है।

योग और प्रेग्नेंसी

किसी महिला के गर्भ धारण करने की क्षमता केवल बायोलॉजिकल नहीं होती है, बल्कि यह शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य, संतुलन और नए जीवन को धारण करने की तैयारी का भी संकेत है। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इंफर्टिलिटी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि मानसिक तनाव और शारीरिक असंतुलन का परिणाम होता है।

कई शोध बताते हैं कि योग प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यह बात समझनी होगी कि योग फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है, बल्कि यह शरीर को गर्भधारण के लिए तैयार करता है। शरीर की प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है, ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और मानसिक तौर पर भी मजबूती देता है।

तनाव कम करने में कैसे मदद करता है योग?

तनाव के दौरान शरीर में HPA Axis सक्रिय हो जाता है, जिससे कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। कॉर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक अधिक रहने पर यह मस्तिष्क में GnRH हार्मोन के स्राव को प्रभावित कर सकता है, जिससे LH और FSH हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है। इसका असर महिलाओं के ओवरी और पुरुषों के टेस्टिकल्स की कार्यक्षमता पर पड़ता है।

योगा वागस नर्व को सक्रिय करती हैं, जिससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। नियमित योग करने से कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है और मस्तिष्क में BDNF यानी BrainDerived Neurotrophic Factor बढ़ता है, जिससे महिलाओं में हार्मोन का संतुलन बेहतर ढंग से होता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान कौनसे योगासन है फायदेमंद?

  • भद्रासन

इस आसन के करने से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और कूल्हे के जोड़ों को खोलने में मदद करता है।

  • वज्रासन

यह एकमात्र ऐसा आसन माना जाता है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इससे पाचन बेहतर होता है और पेल्विक में रक्त प्रवाह बढ़ता है।

  • अंजनेयासन

यह कूल्हों में लचीलापन लाने और कमर दर्द कम करने में मदद कर सकता है। गर्भावस्था में इसे केवल प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।

  • मालासन

यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को आराम देने और शरीर को प्रसव की तैयारी में मदद करता है।

  • चक्की चलनासन

यह कूल्हों के जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान योग के फायदे

  • गर्भाशय में रक्त संचार बढ़ाने में मदद

सुप्तबद्ध कोणासन और जैसे योगासन कूल्हों को खोलने में मदद करते हैं, जिससे गर्भाशय और अंडाशय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इससे यूटेरस की लाइनिंग स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है।

  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मदद

कुछ अध्ययनों के अनुसार, नियमित योग से प्रजनन अंगों में होता है, जिससे गर्भ धारण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है। करने में सहायक हो सकता है, जिससे गर्भधारण के लिए अनुकूल वातावरण बनने में मदद मिलती है।

  • PCOS/PMOS में लाभ

नियमित योग करने से ब्लड शुगर और एंड्रोजन के स्तर को संतुलित करने में मदद मिल सकती है, इससे मासिक धर्म चक्र नियमित होती है और पीएमओएस की समस्या में आराम मिलता है।

योग करते समय बरतें सावधानियां

  • शरीर को जरूरत से ज्यादा स्ट्रेच न करें। गर्भावस्था में रिलैक्सिन हार्मोन के कारण लिगामेंट ढीले हो जाते हैं।
  • गर्भावस्था के अंतिम महीनों में लंबे समय तक पीठ के बल सीधा न लेटें। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
  • गहरे ट्विस्ट, तेज आगेपीछे झुकने वाले आसन और भारी एब्डॉमिनल एक्सरसाइज से बचें।
  • भस्त्रिका और कपालभाति जैसे तेज श्वास अभ्यास न करें। सामान्य और आरामदायक श्वास पर ध्यान दें।