क्या आपका बैंक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में है? पिछले कुछ दिनों से डार्क वेब पर बैंक के एक बड़े डेटा लीक की खबरें तेजी से फैल रही हैं, जिसने ग्राहकों की नींद उड़ा दी है. दावा किया जा रहा है कि हैकर्स के पास बैंक का लगभग एक टेराबाइट डेटा है, जिसमें ग्राहकों के लोन के कागजात, पहचान पत्र और अन्य निजी जानकारियां शामिल हैं. 27 जुलाई को बैंक ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि सुरक्षा में सेंध लगी है. लेकिन राहत की बात यह है कि आपका पैसा सुरक्षित है. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। हैकर्स बैंक के उस ‘कोर सिस्टम’ तक नहीं पहुंच पाए हैं, जहां से पैसों का लेनदेन होता है. हालांकि, असली खतरा हैकर्स से नहीं, बल्कि इस लीक हुए डेटा का फायदा उठाने वाले जालसाजों से है. आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और अपना खाता सुरक्षित रखने के लिए आपको क्या करना चाहिए.

घबराने की जरूरत नहीं, आपका पैसा सेफ है
सबसे पहले तो एक लंबी सांस लीजिए. बैंक ने साफसाफ कहा है कि उनका वो मेन सिस्टम बिल्कुल सुरक्षित है, जहां से पैसों का लेनदेन होता है. हैकर्स वहां तक नहीं पहुंच पाए हैं. असल में हुआ बस इतना है कि बैंक के किसी एक कर्मचारी का ईमेल हैक हो गया और वहां से कुछ जानकारी लीक हो गई. ‘ट्रिपलएक्स’ नाम के एक हैकिंग ग्रुप ने इसे लीक करने का दावा किया है. इस लीक में ग्राहकों के नाम, खाते की जानकारी और कुछ फोटो या आईडी प्रूफ हो सकते हैं. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि कोई रातोंरात आपका बैंक अकाउंट खाली कर देगा.
सिर्फ डेटा लीक होने से खाता खाली नहीं होता
इसे ऐसे समझिए कि किसी को आपके घर का पता चल गया है, लेकिन घर की चाबी अभी भी आपके ही पास है. सिर्फ आपके नाम, आधार या पैन कार्ड के नंबर से कोई भी आपके खाते से पैसे नहीं निकाल सकता. पैसे निकालने के लिए उन्हें आपका पासवर्ड, एटीएम पिन या आपके फोन पर आने वाला ओटीपी चाहिए होगा. और ये सब चीजें डेटा लीक में हैकर्स के हाथ नहीं लगी हैं. साइबर एक्सपर्ट्स भी यही समझा रहे हैं कि ये आपकी पहचान चोरी होने का मामला है, पैसे चोरी होने का नहीं.
हैकर्स से नहीं, जालसाजों से है असली खतरा
अब असली खतरे की बात करते हैं. जालसाज इस लीक हुए डेटा का इस्तेमाल आपको बेवकूफ बनाने के लिए करेंगे. मान लीजिए, आपके पास एक कॉल आता है. सामने वाला इंसान आपका नाम, आपकी ब्रांच और खाते के आखिरी चार नंबर बिल्कुल सहीसही बता देता है. वो कहता है कि “मैं बैंक ऑफ बड़ौदा की सिक्योरिटी टीम से बोल रहा हूं, आपका खाता ब्लॉक हो रहा है.” आप डर जाते हैं और उसकी बात को सच मान लेते हैं. फिर वो आपसे एक ओटीपी मांगता है और घबराहट में आप उसे बता देते हैं. बस! यहीं पर खेल खत्म हो जाता है और आपका पैसा कट जाता है. याद रखिए, दुनिया का कोई भी बैंक कभी भी आपसे फोन या मैसेज पर ओटीपी, सीवीवी या पासवर्ड नहीं मांगता. अगर कोई मांगे, तो तुरंत फोन काट दीजिए.
खुद को सुरक्षित रखने के लिए करें ये 7 काम
बैंक की जांच कब पूरी होगी, इसका इंतजार मत कीजिए. अपनी तरफ से खाते को सेफ करने के लिए तुरंत ये कदम उठाएं:
- अपने नेट बैंकिंग और बैंक के मोबाइल ऐप का पासवर्ड आज ही बदल दें.
- बैंक से फोन पर आने वाले हर एसएमएस और ईमेल को ध्यान से पढ़ें, उन्हें इग्नोर न करें.
- अगर फोन पर कोई लिंक आए जिसमें लिखा हो ‘अपना केवाईसी अपडेट करें’ या ‘अकाउंट बंद हो गया है’, तो उस लिंक पर बिल्कुल क्लिक न करें. आजकल ऐसे फर्जी मैसेज बहुत आ रहे हैं.
- यूआईडीएआई की वेबसाइट या एमआधार ऐप पर जाकर अपने आधार कार्ड का बायोमेट्रिक लॉक कर दें. इसमें मुश्किल से 5 मिनट लगते हैं.
- अपनी सिबिल रिपोर्ट चेक करें. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इससे पता चल जाएगा कि कहीं आपके नाम और आईडी पर किसी और ने कोई लोन तो नहीं ले लिया है.
- अगर आपको अपने खाते में कोई भी गड़बड़ लगे, तो सीधा बैंक को बताएं और 1930 नंबर पर साइबर पुलिस को कॉल करें. घर बैठे इंतजार न करें.
- बैंक में अपना मौजूदा मोबाइल नंबर और ईमेल हमेशा अपडेट रखें.
क्या अब बैंक ऑफ बड़ौदा का खाता बंद कर देना चाहिए?
बिल्कुल नहीं. जानकार कहते हैं कि डेटा लीक होने के डर से खाता बंद कर देना कोई समझदारी नहीं है. आजकल हमारा बहुत सारा डेटा ऑनलाइन मौजूद है और ऐसी घटनाएं अक्सर दूसरे बैंकों और कंपनियों के साथ भी होती रहती हैं. आपको बस थोड़ा होशियार रहने की जरूरत है. अपनी ‘चाबी’ यानी अपना ओटीपी और पासवर्ड किसी को मत दीजिए, आपका पैसा एकदम सुरक्षित रहेगा.



