Guru Purnima Dohe: गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा का दिन शिष्य का गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है। सनातन धर्म में गुरु को भगवान के समान स्थान दिया गया है, क्योंकि वही शिष्य को ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं।

इस साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर आप अपने गुरु को साधारण संदेशों से नहीं बल्कि इन दोहों व श्लोकों के साथ प्रणाम करें, उनका आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहेगा।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा व महर्षि वेदव्यास की जयंती मनाई जाती है। इस दिन गुरु के प्रति सम्मान व आभार व्यक्त करने, उनका आशीर्वाद लेने और ज्ञान के महत्व को याद करने की परंपरा है।
गुरु पूर्णिमा
गुरु महिमा पर प्रसिद्ध दोहे
संत कबीरदास का दोहा
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
संत कबीरदास का यह दोहा बचपन से ही हमें बताया जाता है, जो गरु के महत्व के बारे में बताता है। इसका अर्थ है गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए उनका स्थान सर्वोच्च माना गया है।
संत कबीरदास का दोहा
सब धरती कागद करूं, लेखनि सब बनराय।
सात समुंदर की मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाय।।
संत कबीरदास के इस दोहे का अर्थ है गुरु के गुणों का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। उनका उपकार अनंत है।
गुरु महिमा का प्रसिद्ध श्लोक
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
विश्व विख्यात इस श्लोक का अर्थ है गुरु ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान हैं। वे ही दिखाते हैं।
गुरु पूर्णिमा
गुरु को भेजें ये शुभकामना संदेश
- आपका ज्ञान और आशीर्वाद हमेशा मेरे जीवन का मार्गदर्शन करता रहे। गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
- जिस गुरु ने अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश दिया, उन्हें सादर प्रणाम। गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।
- जिस जीवन में गुरु का आशीर्वाद होता है, उस जीवन में सफलता स्वयं रास्ता ढूंढ लेती है।
- ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सुंदर मार्ग सद्गुरु के चरणों से होकर गुजरता है।
- गुरु हमें केवल किताबें नहीं पढ़ाते, बल्कि जीवन को समझना सिखाते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरु का आशीर्वाद लीजिए। और पूजन करें। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। जरूरतमंदों को दान करें और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें। ज्ञान और शिक्षा के महत्व को जीवन में अपनाएं। गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करें।



