मैहला चंबा। तृप्ता… हम सुबह करीब आठ बजे तक घर पहुंच जाएंगे। ब्रेकफास्ट तैयार रखना, आज सब साथ बैठकर नाश्ता करेंगे। यह बचन सिंह के वे आखिरी शब्द थे, जो उन्होंने हादसे से करीब आधा घंटा पहले अपनी पत्नी तृप्ता देवी से फोन पर कहे थे।

उस समय शायद किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह बातचीत उनकी जिंदगी की आखिरी बातचीत साबित होगी। पति की आवाज सुनकर तृप्ता देवी ने भी राहत की सांस ली। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। उन्हें लगा कि मासूम का इलाज सफल रहा और अब पूरा परिवार सकुशल घर लौट रहा है।
उन्होंने सुबह के नाश्ते की तैयारी की मानसिक योजना भी बना ली थी। लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिख रखा था। घर की चौखट पर अपनों के कदमों की आहट आने से पहले ही एक ऐसी खबर पहुंची, जिसने सब कुछ उजाड़ दिया।
अब एक साथ उठेंगी पांच अर्थियां
लाहड़ के पास देर रात हुई भीषण सड़क दुर्घटना में बचन सिंह, उनके पुलिस जवान पुत्र रिपन कुमार, पुत्रवधू रिम्पी, भतीजी कीर्ति और एक वर्षीय मासूम की मौत हो गई। जिस परिवार के लिए तृप्ता देवी नाश्ता तैयार करने वाली थीं, उसी परिवार की अब एक साथ पांच अर्थियां उनके आंगन से उठेंगी।
मंगलवार सुबह तक तृप्ता देवी दरवाजे की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखती रहीं, लेकिन घर लौटे अपने नहीं, बल्कि उनके निधन की खबर। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। फोन पर किया गया वह एक साधारणसा वादा ब्रेकफास्ट साथ करेंगे अब पूरे गांव की आंखें नम कर देने वाली आखिरी याद बन चुका है।
गेहरा गांव में हर कोई यही कह रहा है कि कभीकभी नियति इंसान से उसके सबसे खूबसूरत वादे भी छीन लेती है।



