Workplace Meeting Stress: क्या आप भी आपके वर्कप्लेस पर होने वाले मीटिंग से परेशान हैं? आपके काम के 89 घंटे बस एक मीटिंग से दूसरी मीटिंग में ही निकल जाता है? अगर दिन खत्म होने के बाद भी जरूरी काम अधूरे रह जाते हैं और आप मानसिक थकावट महसूस करते हैं, तो यह ‘मीटिंग फटीग’ हो सकता है।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लगातार वर्चुअल और ऑफलाइन मीटिंग्स से कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी कम होने लगती है और वह बर्नआउट महसूस करने लगता है।

क्या है Meeting Fatigue?

जब कोई एम्प्लॉय लगातार मीटिंग्स में शामिल होने के कारण मानसिक और महसूस करने लगता है, तो इस परिस्थिति को मीटिंग फटीग कहते हैं। बारबार कॉन्टेक्स्ट बदलना, लगातार स्क्रीन देखना और बिना ब्रेक के मीटिंग्स में बैठना दिमाग पर दबाव डालता है। इससे काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है और एकाग्रता में कमी आ जाती है।

क्यों बढ़ रही है यह समस्या?

वर्कप्लेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, हाइब्रिड और के बाद मीटिंग्स की संख्या काफी बढ़ गई है। ज्यादातर मीटिंग्स ऐसी होती हैं, जिनका उद्येश्य स्पष्ट नहीं होता है। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इससे कर्मचारियों के पास अपने एक्चुअल काम के ले समय नहीं बचता है और ऐसे में वर्कलोड बढञने से वर्क स्ट्रेस भी बढ़ जाता है।

मीटिंग फटीग के लक्षण

  • दिनभर थकान महसूस होना
  • काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • लगातार तनाव या चिड़चिड़ापन
  • सिरदर्द या आंखों में थकान
  • काम की उत्पादकता में कमी
  • मीटिंग्स में रुचि कम होना

इससे बचने के आसान उपाय

  • केवल जरूरी और उद्देश्यपूर्ण मीटिंग्स ही रखें।
  • हर मीटिंग का एजेंडा पहले से तय करें।
  • बैकटूबैक मीटिंग्स के बीच 1015 मिनट का ब्रेक रखें।
  • जिन विषयों पर ईमेल या चैट से काम हो सकता है, वहां मीटिंग अवॉयड करें।
  • कर्मचारियों को बिना बाधा के काम करने के लिए फोकस टाइम दें।
  • केवल जरूरी लोग ही मीटिंग में शामिल हो।
  • नो मीटिंग डे तय करें और उसे बनाएं नए समय की जरूरत। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
  • स्टैंडिंग और वॉकिंग मीटिंग को भी तवज्जो दें।
  • मीटिंग के समय को फिक्स किया जा सकता है।
  • मीटिंग के अंत में निष्कर्ष और आगे किए जाने वाले जरूरी काम की चर्चा करें। अब आगे क्या करना है, जैसी स्पष्टता से काम को दिशा मिलती है।