कांग्रेस आलाकमान के सामने पार्टी में जारी अंदरुनी कलह को खत्म करना बड़ी चुनौती बनी हुई है. पिछले दिनों पार्टी नेतृत्व ने कर्नाटक में लंबे समय से चले आ रही अंदरुनी कलह को खत्म कर मुख्यमंत्री बदलते हुए डीके शिवकुमार को प्रदेश के मुखिया की कमान सौंप दी थी. पंजाब में भी अंदरुनी कलह की स्थिति बनी है और इसे खत्म करने की कोशिश भी जारी है. अब पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी आपसी टकराहट बनी हुई है. अब सूत्रों का कहना है कि यहां के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की भी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है.

सूत्रों के हवाले से खबर है कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में अभी विधानसभा चुनावों के लिए अभी भी डेढ़ साल का वक्त है, लेकिन यहां के सियासी हालात पार्टी के लिए ठीक नहीं है.
अपनी कार्यशैली में करें बड़ा बदलावः रिपोर्ट
रिपोर्ट में आलाकमान से कहा गया है कि या तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली में बड़े स्तर पर बदलाव करें या फिर उनके कामकाज की समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री बदल दिया जाए.
खास बात है कि, सुक्खू राज्य में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया , यूथ कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं, फिर सीधे वह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए. इसलिए पार्टी के अंदर तमाम नेता उनकी प्रशासनिक अनुभव की कमी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं.
मुख्यमंत्री पद को लेकर कई बड़े दावेदार
पार्टी के ही कई अन्य बड़े चेहरे भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अरसे से नजर गड़ाए हुए हैं. मुख्यमंत्री पद के चयन के दौरान रेस में भी ये नेता शामिल थे लेकिन तब राहुल गांधी ने सुक्खू के नाम पर वीटो कर दिया था.
लेकिन राज्य में फरवरी 2024 में कराए गए राज्यसभा चुनाव में अभिषेक मनु सिंघवी की हार हो या फिर इसके बाद राज्य में हुए उपचुनाव में मिली शिकस्त ने सुक्खू की सत्ता की चुनौती दे डाली और यही चीजें उनके गले की फांस बन गईं.
सुक्खू और राहुल के लिए टेंशन भरी रिपोर्ट
इस बीच विक्रमादित्य सिंह कई बार बगावती तेवर के साथ दिखते रहे, लेकिन राहुल गांधी के हस्तक्षेप ने सुक्खू की कुर्सी बचाए रखी, उल्टे पार्टी प्रभारी राजीव शुक्ला की ही छुट्टी हो गई. ऐसे में अब बदलाव के बाद नई पार्टी प्रभारी की रिपोर्ट सुक्खू और राहुल के लिए परेशानी का सबब बन गई है.



