महाराष्ट्र में दूध खरीदने वाले लोगों को अब अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी. राज्य में गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है. मंगलवार यानी 11 अगस्त से दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाएंगे. दूध की कीमत बढ़ाने का फैसला राज्य की प्रमुख सहकारी और निजी डेयरियों के प्रतिनिधियों की बैठक में लिया गया. यह बैठक मिल्क प्रोड्यूसर एंड प्रोसेसर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित की गई थी.

एसोसिएशन के मुताबिक, दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे बढ़ी हुई लागत है. पिछले कुछ समय में डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई है और दूध की पैकेजिंग का खर्च भी काफी बढ़ गया है. एसोसिएशन का कहना है कि पैकेजिंग लागत में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, डेयरियों को किसानों से दूध खरीदने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. आने वाले समय में दूध की खरीद कीमत में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
दही और पनीर भी महंगा
इन बढ़ती लागतों को देखते हुए एसोसिएशन ने दूध की बिक्री कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. यानी 11 अगस्त से महाराष्ट्र में गाय और भैंस के दूध की कीमत मौजूदा दर से 2 रुपये प्रति लीटर ज्यादा हो जाएगी. सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि डेयरी से जुड़े दूसरे उत्पाद भी महंगे होने जा रहे हैं. एसोसिएशन ने डेयरी उत्पादों की कीमतों में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. इसमें दूध से बने अलगअलग उत्पाद शामिल हो सकते हैं. दूध की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर होगा, जो रोजाना बड़ी मात्रा में दूध खरीदते हैं. इसके अलावा दूध से बने उत्पादों की कीमत बढ़ने से दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं.
ईरान युद्ध की वजह से बढ़े दाम
इससे पहले मई में अमूल, मदर डेयरी, सुधा और जयपुर डेयरी ने भी मई में देशभर में दूध के दाम में बढ़ोतरी की थी. उस वक्त कंपनियों ने कहा था कि उनके ऊपर बढ़ी हुई लागत का बोझ बढ़ रहा है. इस वजह से कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है. यह कीमत बढ़ोतरी भी पेट्रोलडीजल की कीमतें बढ़ने के बाद आई थी. क्योंकि ईरान युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई पर असर पड़ा है. अब तक ईरानअमेरिका युद्ध खत्म नहीं हुआ है. हालांकि, ओमान और ईरान के बीच होर्मुज समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. अगर होर्मुज में फिर से जहाजों की आवाजाही शुरू होती है. तेल की कीमतों में नरमी मिल सकती है.



