Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: यूपी में अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले में दाखिल जनहित याचिका पर आज 22 जून सोमवार को सुनवाई हो सकती है। आपको बता दें याचिका में सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच और कैग ऑडिट की मांग की गई है। एसआईटी ने भी 140 पन्नों की जांच रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। रविवार को सीएम से मुलाकात नहीं हो पाने की वजह से माना जा रहा है कि आज टीम सीएम योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंप सकती है।

SIT जांच में खुलासा, निजी एजेंसियों से कराई जा रही थी नोटों की गिनती
श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम को इंवेस्टीगेशन में कई गंभीर लापरवाहियां मिली है। बताया जा रहा है कि जांच के अनुसार नोटों की गिनती निजी एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा कराई जा रही थी। इतना ही नहीं इनकी नियुक्ति सिफारिश के आधार पर हुई थी। इन कर्मचारियों की एंट्रीएग्जिट की जांच भी नहीं होती थी। ड्रेस कोड के साथ साथ सीसीटीवी निगरानी का भी सही पालन इनके द्वारा नहीं किया जाता था।
अनुकल्प मिश्रा ने लगवाई थी साले लवकुश की नोट गिनने में नौकरी
जानकारी के अनुसार एसबीआई ने वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी को ठेका दिया था। इसी निजी सिक्योरिटी एजेंसी ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिश पर अयोध्या के ही लड़कों को नोट गिनवाने के काम में रखा था। इसी का फायदा उठाकर अनुकल्प मिश्रा ने अपने साले लवकुश मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट में नौकरी पर रखवाया था।
सोमवार को हो सकती है सुनवाई
सोमवार की वाद सूची के अनुसार ये जनहित याचिका न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्मकालीन अवकाश खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है। याचिकाकर्ता अधिवरक्ता मोहित अशोक ने बताया कि वह अदालत से इस मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करेंगे।
उन्होंने बताया कि 19 जून को भी ये मामला अदालत के समक्ष आया था, लेकिन समय की कमी के कारण उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस याचिका पर 22 जून को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
स्वतंत्र जांच और कैग ऑडिट की मांग
याचिका में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के रुप में प्राप्त धनराशि के कथित गबन की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। साथ ही पूरे मामले का सीएजी से कराने की मांग रखी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी की जांच आवश्यक है। इसी कारण सीबीआई जांच की मांग भी याचिका में शामिल है।
SIT ने तैयार की 140 पन्नों की जांच रिपोर्ट
इस बीच मामले की जांच कर रही है SIT ने अपनी जांच प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। SIT ने लगभग 140 पन्नों की शुरुआती जांच रिपोर्ट बनाई है। माना जा रहा है कि आज 22 जून को SIT सीएम योगी को रिपोर्ट सौंप सकती है।
7 पेन ड्राइव में सेव किया डेटा
आपको बता दें SIT ने जांच के बाद 7 पेन ड्राइव में डेटा सेव कर लिया है। जानकारी के अनुसार एसआईटी की जांच में 6 दिन की जांच में 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। ऐसा माना जा रहा है इसमें उन 25 लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। जिनसे SIT पूछताछ कर चुकी है। अगले उन्हें अगले आदेश तक कहीं बाहर न जाने की चेतावनी दी गई है। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं।
SIT मामले में आज या कल में FIR भी करा सकती है। चंपत राय के करीबी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और अनुकल्प समेत 80 लोगों को नामजद किया जा सकता है। इसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम भी बताए जा रहे हैं।
टिन्नू चंपत राय का करीबी है। दान राशि की गिनती से जुड़े काम देखता था। उस पर आरोप है कि 8 महीने की CCTV फुटेज डिलीट कराई। वहीं, अनुकल्प मिश्रा भी राम मंदिर में नौकरी करता है।
अयोध्या श्रीराम मंदिर दान चोरी विवाद टाइम लाइन
जून की शुरुआत में खुलासा:
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट जब अपना रूटीन ऑडिट कर रहा था, तब दानपात्र से नकदी और दूसरी चीजें गायब होने का शक हुआ।
सीसीटीवी से खुला राज:
मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब देखी गई, तो वहां काम करने वाले एक कर्मचारी की हरकतें संदिग्ध लगीं। ट्रस्ट ने अंदरूनी तौर पर मामले की जांच शुरू की और शुरुआत में इसे सीक्रेट रखा गया।
7 जून
7 जून को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले को हवा देते हुए योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उनकी ‘डबल इंजन’ सरकार, ड्रोन और दूरबीन सही से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि आस्था के पैसे में चोरी गंभीर चिंता का विषय है।
इसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी इस पर निशाना साधते हुए कहा कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर दान की चोरी बेहद गंभीर है। इसकी पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
10 जून:
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कानपुर दौरे के दौरान चंदा चोरी की बातें सामने आने की बातों को स्वीकारा। उन्होंने साफ किया कि सरकार इसकी जांच करवा रही है और जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
13 जून :
13 जून को मामले को बढ़ता देख सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 3 सदस्यों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन हुआ।
14 जून :
मंदिर के दान पेटी से निकले कैश की गिनती से जुड़े एक कर्मचारी के घर पर गोबर में दबे 10 लाख रुपए कैश मिले। इसके बाद मामला और भी ज्यादा गंभीर हो गया है।
1718 जून :
इस पूरे मामले में पहला और सबसे बड़ा नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सामने आया। टिन्नू पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर थे और अब उनके सहयोगी बताए जाते हैं। आरोप है कि बीते कुछ सालों में उन्होंने अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपये की चलअचल संपत्ति खड़ी कर ली है। राम मंदिर से महज डेढ़ किलोमीटर दूर उनका पुश्तैनी घर है, जहां जांच एजेंसी द्वारा सोना बरामद करने की भी खबर आई।
22 जून :
अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले में जनहित याचिका दाखिल की गई। जिसमें सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच और कैग ऑडिट की मांग की गई है।



