Himachal Monsoon Deaths: मानसून के मौसम में हिमाचल प्रदेश की सुरम्य पहाड़ियां और घुमावदार सड़कें बेहद संवेदनशील और जानलेवा साबित हो रही हैं. भूस्खलन, चट्टानों के खिसकने, लैंडस्लाइड और खराब मौसम के चलते राज्य की सड़कों पर हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. पुलिस और यातायात विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सीजन में राज्यभर में सड़क हादसों के कारण 98 लोगों की जान जा चुकी है.

सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार गाड़ियों की टक्कर नहीं, बल्कि पहाड़ों से गिरते बड़ेबड़े पत्थर , खिसकती चट्टानें, खराब सड़कें, कम दृश्यता और मानवीय लापरवाही बनी हैं. हिमाचल प्रदेश ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून के दौरान राज्य में चंबा और सिरमौर जिले सबसे ज्यादा खतरनाक और संवेदनशील साबित हुए हैं. इस अवधि में दोनों जिलों में सड़क हादसों के कारण सबसे ज्यादा 1616 लोगों ने अपनी जान गंवाई है.

हाल में हुए कुछ बड़े और खौफनाक हादसे

5 अगस्त : चंबाभरमौर मार्ग पर चलती हुई एक एसयूवी की सनरूफ को चीरते हुए एक बड़ा पत्थर अंदर आ गिरा, जिससे पंजाब के एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई.

8 अगस्त : बैरागढ़तीसा मार्ग पर चालुज मोड़ के पास एक निजी बस गहरी खाई में गिरकर दूसरी सड़क पर जा गिरी. इस भीषण हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

सोलन हादसा: सोलन जिले में नेशनल हाईवे205 पर चलती कार पर अचानक भारी पत्थर गिर गया, जिससे शिमला के 63 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी और बेटा घायल हो गए.

11 मई : लाहरूतुन्नूहट्टी मार्ग पर काकिरा के पास एक एसयूवी गहरी खाई में गिर गई, जिसमें गुजरात के 5 पर्यटकों और स्थानीय ड्राइवर समेत 6 लोगों की मौत हुई थी.

हादसों की मुख्य वजहें: अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय

एसपी चंबा ने बताया ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम के दौरान हादसों का खतरा हमेशा बहुत अधिक रहता है. इसके पीछे मानवीय लापरवाही से लेकर वाहनों में आई यांत्रिक खराबी तक कई कारण हो सकते हैं. एसपी सिरमौर ने बताया जिले के ऊपरी इलाकों जैसे संग्रह और हरिपुरधार में हमने पाया कि कंक्रीट या लोहे के क्रैशबैरियर की भारी कमी है. वहीं निचले इलाकों जैसे माजरा में स्पीड बैरियर की जरूरत है. इसके लिए NHAI और हिमाचल लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा गया है.

क्या पहाड़ी इलाकों में सीटबेल्ट बन रही है जानलेवा?

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ जसवंत सिंह ने पहाड़ी इलाकों में सीटबेल्ट के नियमों की समीक्षा करने की मांग उठाई है. उन्होंने 1 अगस्त को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 194B की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने की अपील की है. तर्द दिया कि जब वाहन खाई में गिरता है या अचानक लैंडस्लाइड होता है, तो यात्रियों के पास बचने के लिए कुछ ही सेकेंड का समय होता है. कई मामलों में देखा गया है कि वाहन खाई में गिरने के बाद शव सीटबेल्ट में ही फंसे रह गए. आपात स्थिति में गाड़ी से तुरंत बाहर निकलने की क्षमता जीवन बचाने में मददगार हो सकती है.

आंकड़ों में हिमाचल प्रदेश का पिछला और वर्तमान रिकॉर्ड

2025 का मानसून रिकॉर्ड के मुताबिक, 30 जून से 15 सितंबर 2025 तक राज्य में सड़क हादसों में कुल 189 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी. राज्य पुलिस ने हिमाचल में कुल 519 एक्सीडेंटप्रोन ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की है, जिनमें से करीब 310 में सुधार कर लिया गया है. इसके अलावा 1,643 खतरनाक सड़क खंडों में से 1,089 पर सुधारात्मक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 554 स्थानों पर काम लंबित है.