देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इसकी पूर्व संध्या पर भारत की रक्षा ताकत और आत्मनिर्भरता को लेकर कई बड़ी उपलब्धियां सामने आईं. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और निबे प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 1,577 करोड़ रुपये के दो डील की. इनमें सेना के लिए आधुनिक ‘लोइटर म्यूनिशन सिस्टम’, गोलाबारूद और दूसरे जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे. खास बात यह है कि ये खरीद भारतीय कंपनियों से की जा रही है. इसी मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी देश को रक्षा क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन अब रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है, जबकि रक्षा निर्यात भी तेजी से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया है.

लोइटर म्यूनिशन सिस्टम एक आधुनिक हथियार प्रणाली है, जो हवा में कुछ समय तक मंडराकर सही लक्ष्य की पहचान कर उसे निशाना बना सकती है. यह खास तौर पर भारतीय सेना की तोपखाना इकाइयों की हमला करने की क्षमता और काम करने की गति बढ़ाने में मदद करेगी. इसकी खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत ‘बाय ’ श्रेणी में की जा रही है. आसान भाषा में कहें तो सेना यह हथियार भारतीय कंपनियों से खरीद रही है. इससे सेना की ताकत बढ़ने के साथ देश में हथियार बनाने वाली कंपनियों को भी बढ़ावा मिलेगा. यह डील ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम कदम है.

रक्षा उत्पादन में चार गुना उछाल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 में जहां करीब 46,000 करोड़ रुपये था. वहीं, वित्तीय वर्ष 202526 में यह रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यानी करीब एक दशक में इसमें लगभग चार गुना बढ़ोतरी हुई है. इस उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और दूसरी सरकारी संस्थाओं की हिस्सेदारी करीब 76% रही, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान पिछले साल के 22% से बढ़कर 24% हो गया है. रक्षा मंत्री ने इसे रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए बढ़ते अवसरों का संकेत बताया.

रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है. वित्तीय वर्ष 201314 में जहां डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 686 करोड़ रुपये था. वहीं, वित्त वर्ष 202526 में यह 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यानी इस दौरान 5,500% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. आज भारत में 145 रक्षा निर्यातक कंपनियां हैं और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से ज्यादा देशों को भेजे जा रहे हैं. रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा.

बजट और अनुसंधान पर बढ़ता जोर

रक्षा बजट के मामले में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है. यह वित्त वर्ष 201314 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 202627 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है. हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए रखा गया पूंजीगत खर्च भी 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है. नई रक्षा तकनीक तैयार करने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट यानी अनुसंधान एवं विकास का बजट भी वित्त वर्ष 201415 के 15,283 करोड़ रुपये से करीब 90% बढ़कर वित्त वर्ष 202627 में 29,100 करोड़ रुपये हो गया है. इसके अलावा, पिछले एक साल में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इससे साफ है कि सरकार सेना के आधुनिकीकरण पर बड़ा जोर दे रही है.

स्वदेशी हथियार तकनीक में नई उपलब्धियां

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ और रक्षा बलों की कई अहम उपलब्धियों का भी जिक्र किया, जो भारत को भविष्य की युद्ध तकनीक में मजबूत बना रही हैं. इनमें पहली ‘टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन’ प्रणाली का सफल परीक्षण, MIRV तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल, लंबी दूरी की जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल, RudraMII, नेवल एंटीशिप मिसाइलएसआर और पिनाका गाइडेड रॉकेट के सफल परीक्षण शामिल हैं.

इसके अलावा 1,200 सेकंड से ज्यादा समय तक चले एक्टिव कूल्ड फुलस्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर परीक्षण को भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इस परीक्षण के साथ भारत हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है. स्वदेशी ‘कुशा’ लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल के पहले सफल परीक्षण ने भी भारत की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया है.

ECHS में हुई 300% की बढ़ोतरी

रक्षा मंत्री ने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़े कदमों का भी उल्लेख किया. पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के बजट में पिछले पांच वर्षों में 300% की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष के तहत जरूरतमंद पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मिलने वाली मदद, जैसे शिक्षा और विवाह सहायता की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने रक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना की. इसमें NDA से प्रशिक्षण पाने वाली पहली महिला कैडेट बैच का कमीशन और नौकायन पोत ‘त्रिवेणी’ पर पहला त्रिसेवा सर्वमहिला अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ शामिल है.

कुल मिलाकर, 1,577 करोड़ रुपये की लोइटर म्यूनिशन डील और 1.78 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन बताता है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को तेजी से घरेलू स्तर पर पूरा करने की दिशा में बढ़ रहा है. यह सिर्फ हथियारों की खरीद या उत्पादन बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के खुद को एक बड़े रक्षा विनिर्माण केंद्र और रक्षा निर्यातक देश के रूप में स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है.