सूरजपुर : शांत जिले की सतह के नीचे इन दिनों एक खतरनाक सन्नाटा पल रहा है.जिला मुख्यालय से लेकर अलग-अलग थाना क्षेत्रों तक प्रतिबंधित और नशीली दवाओं की खुलेआम उपलब्धता ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.इंजेक्शन, नशीली कफ सिरप, टैबलेट और अन्य प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई किसी इक्का-दुक्का दुकान तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क के रूप में फैलती नजर आ रही है.
समय-समय पर पुलिस द्वारा जब्ती और गिरफ्तारी की खबरें जरूर आती हैं, लेकिन हर कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल हवा में तैरता रह जाता है—जब पकड़ हो रही है तो आखिर यह जहर आ कहां से रहा है? सप्लाई चैन की जड़ तक पहुंचने की ठोस और निर्णायक पहल क्यों नहीं दिख रही?
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार यह कारोबार केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित नहीं है.आशंका जताई जा रही है कि अंतरजिला स्तर पर संगठित आपूर्ति हो रही है, जिसमें अंबिकापुर, कोरिया और आसपास के क्षेत्रों की कड़ियां जुड़ी हो सकती हैं.कुछ सूत्र तो संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी ओर संकेत करते हैं। यदि यह सच है, तो मामला केवल स्थानीय कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि बड़े स्तर की तस्करी का बनता है.
स्थिति की भयावहता इस बात से भी झलकती है कि असुरक्षित इंजेक्शन के उपयोग से एचआईवी और अन्य गंभीर संक्रमण के मामलों में वृद्धि की चर्चाएं सामने आ रही हैं.कई परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं.युवाओं की असमय मृत्यु, चोरी और छोटे-बड़े अपराधों में बढ़ोतरी ने समाज को असहज कर दिया है.सवाल सीधा है—इन बर्बाद होते घरों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जनमानस में यह धारणा भी गहराती जा रही है कि यदि केवल छोटे स्तर के विक्रेताओं पर कार्रवाई होती रही और मुख्य सप्लायर व वित्तीय नेटवर्क तक जांच नहीं पहुंची, तो यह लड़ाई अधूरी ही रहेगी.विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता स्तर से पूछताछ कर सप्लाई की कड़ियां जोड़ी जाएं तो बड़े गिरोह तक पहुंचना संभव है.साथ ही, वित्तीय लेनदेन की जांच और कठोर कानूनी प्रावधानों—विशेषकर NDPS Act—के तहत प्रभावी कार्रवाई ही इस जाल को तोड़ सकती है.
कुछ नागरिकों का आरोप है कि यदि बार-बार कार्रवाई के बावजूद नेटवर्क जिंदा है, तो कहीं न कहीं व्यवस्था की कमजोरी या संभावित मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता.हालांकि इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन पारदर्शी और जवाबदेह जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है.
हाल ही में एक सामाजिक संगठन ने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज और पुलिस अधीक्षक सूरजपुर को ज्ञापन सौंपकर संयुक्त टीम गठित कर विशेष अभियान चलाने की मांग की है.ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक थोक सप्लायर, मुख्य डीलर और अंतरजिला कनेक्शन की पहचान कर निर्णायक प्रहार नहीं किया जाएगा, तब तक यह नेटवर्क बार-बार सिर उठाता रहेगा.
सूरजपुर जैसे जिले में यदि नशे का जाल इतनी गहराई तक फैल चुका है, तो यह केवल अपराध नहीं—एक सामाजिक आपदा है.अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इस बार जांच सतह से आगे बढ़ेगी? क्या सप्लाई चैन की जड़ तक पहुंचकर उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी?
जिले की युवा पीढ़ी और चिंतित परिवार ठोस परिणाम की प्रतीक्षा में हैं—क्योंकि अब सवाल केवल कानून का नहीं, भविष्य का है.