गजब! खराब चप्पलों से बनाया सेल्फी पॉइंट, फोटो खिंचाने पहुंच गया ‘मटरू’; तस्वीर हो गई वायरल

गजब! खराब चप्पलों से बनाया सेल्फी पॉइंट, फोटो खिंचाने पहुंच गया ‘मटरू’; तस्वीर हो गई वायरल

जहां आमतौर पर मेले खत्म होते ही कचरे के ढेर और अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बागपत जिले ने इस सोच को ही बदल दिया है. जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर आयोजित ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक विचार क्रांति बनकर उभरा है. एक ऐसा मॉडल जो बताता है कि बेकार पड़ी चीजें भी विकास का आधार बन सकती हैं.

जी हां, बागपत DM अस्मिता लाल ने कचरे को समस्या नहीं, संभावना के रूप में देखा. खराब और त्यागी गई चप्पलों के ढेर को इकट्ठा कर उनसे मजबूत और आकर्षक मैट तैयार किए गए. ये मैट अब आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के बैठने के काम आएंगे. यानि जो चप्पलें बेकार समझी गईं, वही अब शिक्षा की बुनियाद मजबूत करेंगी.

सेल्फी पॉइंट पर बैठा ‘मटरू’

सिर्फ इतना ही नहीं, उन्हीं चप्पलों से एक अनोखा और रंगीन सेल्फी पॉइंट तैयार किया गया, जिसने मेले को नई पहचान दी. लोग तस्वीरें खिंचवाते हुए यह संदेश दे रहे हैं कि बागपत अब कचरे से नहीं, नवाचार से पहचाना जाएगा. यही नहीं शुक्रवार को इस सेल्फी पॉइंट पर आकर एक लंगूर भी बैठ गया. यह देख लोग उसका फोटो-वीडियो बनाने लगे. बता दें कि इस लंगूर का नाम ‘मटरू’ है, जो कलेक्ट्रेट में ही रहता है.

-

प्लास्टिक की बोतलें, जो अक्सर पर्यावरण के लिए अभिशाप मानी जाती हैं, उन्हें रीसायकल कर रुई जैसे बारीक फाइबर में बदला गया. इन्हीं फाइबर से तैयार हुई बागपत की अपनी गुड़िया नन्ही कली. यह गुड़िया केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि स्थानीय महिला समूहों के लिए आत्मनिर्भरता का नया अवसर है. नन्ही कली अब बागपत की पहचान बनने जा रही है. वहीं पूजा में चढ़े फूलों को भी फेंका नहीं गया.

सोलर ड्रायर के माध्यम से उन्हें सुखाकर अगरबत्ती तैयार की गई, जो फिर मंदिरों और घरों में उपयोग होगी. आस्था और पर्यावरण संरक्षण का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है. DM अस्मिता लाल का यह मॉडल केवल स्वच्छता अभियान तक सीमित नहीं है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। उन्होंने पहले भी जनपद में महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त करने, शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने जैसे कई प्रभावी कदम उठाए हैं.

ये भी पढे़ं-

बागपत में ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ का आयोजन

अब ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ के जरिए उन्होंने एक स्पष्ट संदेश दिया है. विकास केवल बजट से नहीं, सोच से होता है. बागपत आज एक प्रयोगशाला की तरह सामने आया है, जहां कचरा संसाधन बना, समस्या अवसर बनी और एक प्रशासनिक पहल जनभागीदारी का उत्सव बन गई. यह कहानी सिर्फ बागपत की नहीं, बल्कि उस नए भारत की है, जहां तरक्की का रास्ता कचरे के ढेर से भी निकल सकता है. अगर नेतृत्व दूरदर्शी हो और इरादे मजबूत हों.

Leave a Reply