
साल 2026 का होलिका दहन बहुत खास है क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है. इसके चलते इंटरनेट पर होलिका दहन 2 मार्च को करें या 3 मार्च को, इसे लेकर खासी डिबेट चल रही है. उस पर यह सवाल भी गूगल पर खूब सर्च किया जा रहा है कि किन-किन लोगों को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. आमतौर पर ये बात लोग जानते हैं कि नवविवाहिता को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. लेकिन इसके अलावा भी कुछ खास महिलाओं-लड़कियों को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. वरना उनके और परिवार के जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है.
इन लोगों को नहीं देखना चाहिए होलिका दहन
प्रेगनेंट महिलाएं- फाल्गुन पूर्णिमा की रात को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होली जलाई जाती है. गर्भवती महिलाओं को ये होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. यह उनके और गर्भस्थ बच्चे के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता है. ना ही गर्भवती महिलाओं को होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए. एक तो यह अग्नि भगवान के भक्त बालक प्रहलाद को जलाने के लिए जलाई गई थी, दूसरा अग्नि का तेज ताप और धुआं भी उनकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है.
शिशु – नवजात बच्चे को भी होलिका दहन में नहीं ले जाना चाहिए. होली खेलने से पहले की इस रात नकारात्मक शक्तियां प्रबल होती हैं, ऐसे में नवजात बच्चे को बुरी नजर लग सकती है या उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.
सास-बहू – कई जगह यह मान्यता भी है कि सास और बहू को साथ में खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। इससे उनके रिश्तों में खटास बढ़ती है, उनके रिश्ते बिगड़ते हैं. घर में कलह रहती है.
इकलौती संतान की मां – यह भी माना जाता है कि ऐसी मांएं जिनकी केवल एक संतान है, उन्हें भी होलिका दहन देखने से बचना चाहिए. क्योंकि भक्त प्रहलाद भी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे.
जिस लड़की की शादी तय हो गई हो – ऐसी लड़की जिसकी शादी तय हो गई हो और कुछ ही महीनों में विवाह हो उसे भी होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. वह जिंदगी के नए पड़ाव में प्रवेश करने वाली है, लिहाजा उसे जलती हुई होली देखने से बचना चाहिए.