भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE के शेयर ने पिछले दो साल में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. पिछले 3 महीनों में BSE का मार्केट कैप करीब 30,000 करोड़ रुपये घट गया है. शेयर पर लगातार दबाव बना हुआ है और इसकी वजह से निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BSE के कारोबार पर इस समय तीन बड़े दबाव हैं. पहला है नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन , दूसरा इंडेक्स ऑप्शंस में घटता कारोबार और तीसरा ब्रोकर्स के लिए RBI के सख्त बैंक गारंटी नियम.
ऑप्शंस कारोबार में गिरावट
BSE की कमाई में डेरिवेटिव्स और खासकर इंडेक्स ऑप्शंस की बड़ी भूमिका है, लेकिन अगस्त में अब तक BSE का एवरेज डेली ऑप्शंस टर्नओवर जुलाई के मुकाबले करीब 12% कम रहा है. Nuvama के मुताबिक, BSE का प्रीमियम टर्नओवर 22.7% घटकर करीब 18,100 करोड़ रुपये रह गया. वहीं ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या भी करीब 30.5% कम हुई है. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह CAS को माना जा रहा है. इस व्यवस्था में दिन के अंत में शेयर या ऑप्शन की क्लोजिंग कीमत ऑक्शन के जरिए तय होती है. इससे एक्सपायरी के समय ऑप्शंस की कीमत में होने वाला बदलाव पहले की तरह आसानी से अनुमानित नहीं रह गया है.
BSE पर ज्यादा असर क्यों?
BSE के डेरिवेटिव्स कारोबार में एक्सपायरी डे का काफी महत्व है. जुलाई में BSE के करीब 72.6% कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायरी डे पर हुए थे. ऐसे में अगर एक्सपायरी वाले दिन ट्रेडिंग घटती है तो BSE को ज्यादा नुकसान होता है. इसके अलावा BSE के शेयर में तेजी की बड़ी वजह Sensex ऑप्शंस में लगातार बढ़ती बाजार हिस्सेदारी थी. अब अगर यह ग्रोथ धीमी पड़ती है तो शेयर की ऊंची वैल्यूएशन को सही ठहराना मुश्किल हो सकता है.
ब्रोकरेज फर्मों ने घटाया अनुमान
इसी वजह से कई ब्रोकरेज ने BSE की कमाई के अनुमान घटा दिए हैं. Jefferies ने FY27 से FY29 के EPS अनुमान में 512% की कटौती की है. वहीं Nuvama ने FY27 और FY28 के EPS अनुमान 6.3% और 15% घटाए हैं. RBI के नए बैंक गारंटी नियम भी ब्रोकर्स के कारोबार और हाईफ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग पर असर डाल सकते हैं. Jefferies का अनुमान है कि अगले एक साल में इससे प्रीमियम टर्नओवर 10% तक कम हो सकता है.
क्या BSE में वापसी की उम्मीद है?
BSE के लिए तस्वीर पूरी तरह खराब नहीं है. एक्सचेंज ऑप्शन फीस बढ़ाकर अपनी कमाई बढ़ा सकता है. इसके अलावा मार्केट में उतारचढ़ाव बढ़ने, CAS के साथ ट्रेडर्स के बेहतर तरीके से एडजस्ट होने और ऑक्शन में लिक्विडिटी बढ़ने से कारोबार फिर मजबूत हो सकता है. हालांकि, Jefferies ने BSE को अंडरपर्फॉम कर दिया है और टारगेट प्राइस 3,520 रुपये से घटाकर 2,940 रुपये कर दिया है. Nuvama ने भी इसे होल्ड रेटिंग दी है और टारगेट 4,090 रुपये से घटाकर 3,240 रुपये किया है.
इसलिए अभी BSE में निवेश करने वाले लोगों को सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. ऑप्शंस कारोबार, CAS और आने वाली तिमाहियों की कमाई पर नजर रखना ज्यादा जरूरी होगा.


