हिमाचल प्रदेश के लोगों को जल्द ही रसोई गैस सिलेंडर की झंझट से राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार ने घर-घर पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस पहल के लागू होने के बाद लोगों को सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी और खत्म होने की चिंता से छुटकारा मिल सकेगा।
सरकार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार पर जोर दे रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता और मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है, ताकि लोगों को सस्ती और स्थिर गैस उपलब्ध कराई जा सके।
दरअसल, कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ता है। ऐसे में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के जरिए घरों तक सीधे गैस पहुंचाने की योजना इस प्रभाव को कम करने में मदद करेगी।
इस योजना को लेकर शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव (खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले) आरडी नजीम की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रदेश में कार्यरत चार CGD कंपनियों की समस्याओं और परियोजना से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई।
अधिकारियों के अनुसार, CGD नेटवर्क एक भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली है, जो घरों, दुकानों और उद्योगों तक सीधे प्राकृतिक गैस पहुंचाती है। यह व्यवस्था LPG सिलेंडर के मुकाबले अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और किफायती मानी जाती है।
सरकार का लक्ष्य LPG पर निर्भरता कम कर PNG के उपयोग को बढ़ावा देना है। इस दिशा में ऊना जिले में लगभग 13 हजार घरों तक पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिनमें से करीब 6 हजार उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
हालांकि, इस परियोजना के विस्तार में कंपनियों को भूमि और प्रशासनिक स्तर पर कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इन्हें दूर करने के लिए मार्च 2026 में हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के तहत भूमि खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अब CGD कंपनियां अपने आवेदन सीधे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निदेशक को जमा करेंगी, जिन्हें आगे राजस्व विभाग की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इससे प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कंपनियां सरकारी भूमि पर काम करना चाहती हैं, तो उन्हें लोक निर्माण विभाग को बैंक गारंटी देनी होगी और खुदाई व मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार करना होगा।
इसके साथ ही सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि CGD कंपनियों के आवेदनों पर सात दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। यदि तय समय में जवाब नहीं दिया जाता है, तो अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी।
सरकार ने अधिकारियों को लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने और कंपनियों को विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम में तेजी लाने के निर्देश भी दिए हैं।
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