Curd benefits for diabetic patients: डायबिटीज मैनेजमेंट में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि कौन सा फूड ब्लड शुगर में अचानक ‘स्पाइक’ ला सकता है। गर्मी के मौसम में दही और छाछ का सेवन बढ़ जाता है, लेकिन डायबिटीज मरीजों के लिए दही का कार्बोहाइड्रेट कंटेंट और उसकी मिठास चिंता का विषय हो सकती है। अब सवाल ये उठता है कि क्या दही वाकई शुगर कंट्रोल करने में मददगार है या यह डायबिटीज मरीजों का जोखिम बढ़ा सकती है?

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई सलाह को चिकित्सकीय परामर्श के रूप में न लें। किसी भी डाइट या स्वास्थ्य से जुड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कुछ समय पहले दही निर्माताओं को type 2 diabetes के जोखिम को कम करने में दही की भूमिका का विज्ञापन करने की अनुमति दी। FDA के मुताबिक हफ्ते में कम से कम दो कप दही खाने से डायबिटीज होने का जोखिम कम हो सकता है। अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली से मास्टर डिग्री प्राप्त भारतीय एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉक्टर अंबरीश मिथल ने बताया दही के सेवन और डायबिटीज के कम जोखिम के बीच संबंध का दावा नया नहीं है। कई रिसर्च में दही को डायबिटीज मरीजों के लिए या डायबिटीज के जोखिम को कम करने में असरदार माना गया है।
रिसर्च से जानिए डायबिटीज मरीजों पर दही का सेवन कैसे करता है असर?
कई बड़े अध्ययनों से पता चला है कि दही जैसे फर्मेंटेड दूध उत्पाद टाइप 2 डायबिटीज के खतरे के जोखिम को कम कर सकता हैं। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं द्वारा 100,000 प्रतिभागियों के आंकड़ों का मेटाविश्लेषण में पाया गया है कि दही का रोजाना सेवन डायबिटीज के जोखिम को 18 प्रतिशत तक कम कर सकता है। रिसर्च के मुताबिक दूसरे डेयरी उत्पादों या कुल डेयरी सेवन का ऐसा कोई सुरक्षात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है जैसा दही से मिलता है। 2013 में ऑस्ट्रेलियन डायबिटीज, ओबेसिटी, एंड लाइफस्टाइल की रिसर्च ने सुझाव दिया है कि पूरी तरह फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट प्रीडायबिटीज विकसित होने की संभावना को कम कर सकते हैं।
दही की न्यूट्रिशन वैल्यू
दही एक ऐसा फर्मेंटेड फूड है जिसमें पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, बी विटामिन और मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिजों भरपूर होते है। बैक्टीरिया द्वारा फॉर्मेट दूध से बना दही प्रोबायोटिक्स का एक बेहतरीन स्रोत है, जो सूजन को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में सहायक हो सकता है। हाल के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि फुल क्रीम डेयरी उत्पादों का सेवन हृदय रोग या स्ट्रोक के जोखिम से संबंधित नहीं है।
डायबिटीज का जोखिम कम करने में किसी भी तरह के दही का सेवन उचित है?
डॉक्टर अंबरीश मिथल ने बताया मधुमेह के जोखिम को कम करने के लिए किसी भी तरह के दही का सेवन करना उचित नहीं है। बाज़ार में मिलने वाले ज्यादातर दही मीठे होते हैं, जिससे उनमें अतिरिक्त कैलोरी होती है। यह अतिरिक्त चीनी दही के सेवन के लाभकारी प्रभाव को कम कर सकती है, हालांकि एफडीए ने इस संबंध में कोई स्पष्ट अंतर नहीं बताया है। दही का सेवन भी आपकी कुल कैलोरी सीमा के अनुरूप होना चाहिए। मीठे दही से कैलोरी सेवन को कंट्रोल करना काफी मुश्किल हो जाता है। मीठा दही या फुल क्रीम दूध से तैयार दही का सेवन डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकता है।
कौन सा दही सबसे बेहतर है?
दही में लैक्टोज और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो ब्लड ग्लूकोज लेवल को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, अधिकांश डेयरी प्रोडक्ट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसलिए ऐसे दही से बचें जिनमें अतिरिक्त चीनी मिलाई गई हो। साथ ही, इसका फैट कंटेंट जरूर जांचें और यह भी सुनिश्चित करें कि इसकी कैलोरी आपकी रोज़ाना की डाइट में फिट बैठती है या नहीं। एक्सपर्ट ने बताया डायबिटीज मरीजों के लिए बिना फ्लेवर वाला ग्रीक योगर्ट एक अच्छा विकल्प माना जाता है। बेहतर होगा कि आप सादा दही लें और घर पर उसमें बादाम, बेरीज़ या फ्लैक्स सीड या चिया सीड्स जैसे हेल्दी सीड्स मिलाकर खाएं। भारत में आमतौर पर भैंस के दूध से दही बनाया जाता है, जिसमें गाय के दूध की तुलना में ज्यादा फैट होता है।
दही खाने का सही समय
दही सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे सही समय पर खाना ज्यादा जरूरी होता है। आमतौर पर रात में दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे बलगम बनने की संभावना बढ़ सकती है और कुछ लोगों को पाचन से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है। वहीं, खाली पेट दही खाना भी सही नहीं माना जाता। ऐसा करने पर पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड दही के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इसलिए दही खाने का सबसे अच्छा समय दिन का होता है। आप इसे लंच के साथ या दिन में किसी भी समय ले सकते हैं, ताकि शरीर को इसके पोषक तत्वों का पूरा फायदा मिल सके और पाचन भी बेहतर बना रहे।



