परीक्षा का समय हो या नई चीजें सीखने की उम्र, हर पेरेंट चाहते हैं कि उनके बच्चे का दिमाग तेज चले। विज्ञान कहता है कि बच्चों के दिमाग का Hippocampus यानी मेमोरी सेंटर जितना मजबूत होगा, उनकी याददाश्त उतनी ही पैनी होगी। अच्छी खबर यह है कि Neuroplasticity की वजह से बचपन में दिमाग को सही पोषण देकर उसे ‘शार्प’ किया जा सकता है। DHA जो ओमेगा3 फैटी एसिड का प्रकार है। दिमाग का लगभग 60% हिस्सा इस फैट से बना है, और इसमें सबसे महत्वपूर्ण है DHA । यह ओमेगा3 फैटी एसिड बच्चों के ब्रेन सेल्स के बीच संचार को बेहतर बनाता है, जिससे उनका फोकस और रिकॉल वैल्यू बढ़ती है। बच्चों की याददाश्त तेज करने के लिए ब्रेन Hippocampus, Neuroplasticity और DHA को बेहतर रखना जरूरी है। बचपन में दिमाग को सही पोषण देकर उसे ‘शार्प’ किया जा सकता है। इसमें सबसे अहम भूमिका DHA की होती है, जो कि एक विशेष ओमेगा3 फैटी एसिड है। दिमाग का लगभग 60% हिस्सा फैट से बना है। कुछ फूड्स का सेवन दिमाग के इन हिस्सों की सारी डिमांड को पूरा करने में असरदार साबित होता है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि कुछ खास चीजों का सेवन याददाश्त को तेज कर सकता है। काम करने की क्षमता को बढ़ा सकता हैं।

Virtua Nutrition & Diabetes Care में रजिस्टर्ड डायटीशियन गेल कोहेन ने बताया अगर आप चाहते हैं कि आपका दिमाग फालतू चीजें नहीं सोचे और हेल्दी तरीके से काम करे तो आप अपनी डाइट में सुधार करें। कुछ फूड मस्तिष्क की सुरक्षा करने वाले पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो आपके सोचने और महसूस करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं और उम्र बढ़ने के साथ होने वाले कुछ नकारात्मक मस्तिष्क परिवर्तनों को रोक सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौनकौन से फूड्स दिमाग के लिए दवा का काम करते हैं।
बेरीज का सेवन करें
हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा 16,000 महिलाओं पर की गई एक रिसर्च के मुताबिक बच्चे अगर रोज बेरीज खाते हैं तो उनकी याददाश्त कमजोर होने की गति 2.5 साल तक धीमी हो जाती है। इनमें एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है जो मस्तिष्क को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है। रिसर्च के मुताबिक जो बच्चे रोज ब्लूबेरी और दूसरी बेरीज का सेवन करते हैं वो दूसरे बच्चों के मुकाबले शब्दों को ज्यादा बेहतर तरीके से याद कर सकते हैं। बेरीज खाने वाले बच्चे दो घंटों के अंदर ही ज्यादा से ज्यादा शब्दों को अपनी मेमोरी में शामिल कर लेते हैं। बेरीज में मौजूद केमिकल दिमाग में खून के प्रवाह को बढ़ाता है जिससे दिमाग को ऊर्जा,ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। एक दूसरी रिसर्च में पाया गया है कि 70 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं हर हफ्ते या रोजाना दो से तीन स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी खाती हैं तो उनकी दिमागी सेहत दूसरों से ज्यादा अच्छी होती है।
याददाश्त तेज करने के लिए अंगूर खाएं
अंगूर न केवल एक स्वादिष्ट फल है, बल्कि आधुनिक विज्ञान इसे ‘मेमोरी बूस्टर’ के रूप में भी देख रहा है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि रोजाना दो बार अंगूर का सेवन करने से अर्ली डिक्लाइन यानी याददाश्त की शुरुआती कमी को रोका जा सकता है। अंगूर में भरपूर मात्रा में पॉलीफेनोल्स होते हैं। यह शोध उन लोगों पर किया गया था जिनकी याददाश्त उम्र के साथ कमजोर हो रही थी। 6 महीने बाद अंगूर खाने वालों के मस्तिष्क के उन हिस्सों में ‘मेटाबॉलिक एक्टिविटी’ बेहतर पाई गई जो याददाश्त और ध्यान के लिए जिम्मेदार होते हैं। रिसर्च बताती है कि अंगूर खाने से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ता है, जो रक्त वाहिकाओं को आराम देता है।
अखरोट खाएं याददाश्त बेहतर होगी
कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है जो लोग अखरोट का सेवन करते हैं उनकी याददाश्त बेहतर होती है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स के डॉ. लेनोर अरब द्वारा किया गया एक बड़ा अध्ययन ‘The Journal of Nutrition, Health & Aging’ में प्रकाशित हुआ। रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से अखरोट खाते हैं, उन्होंने संज्ञानात्मक परीक्षणों में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। इसमें याददाश्त, एकाग्रता और सूचनाओं को प्रोसेस करने की गति शामिल थी। यह सुधार उम्र, लिंग या जातीयता की परवाह किए बिना सभी समूहों में देखा गया। प्रोटीन,हेल्दी फैट से भरपूर अखरोट दिमाग के लिए बेस्ट होता है। रोजाना दो अखरोट का सेवन आपकी ब्रेन पावर बढ़ाने के लिए काफी है।
डार्क चॉकलेट खाएं
Frontiers in Nutrition के एक अध्ययन के अनुसार, कोको में मौजूद फ्लेवोनोइड्स मस्तिष्क के उन हिस्सों में जमा होते हैं जो सीखने और याददाश्त से जुड़े होते हैं।
यह मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है और मूड को बेहतर बनाने वाले ‘एंडोर्फिन’ रिलीज करता है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है।
पालक, केल और ब्रोकली खाएं
Neurology जर्नल की एक रिसर्च के मुताबिक रोजाना एक सर्विंग हरी सब्जी खाने वालों का दिमाग उन लोगों की तुलना में 11 साल छोटा यानी ज्यादा एक्टिव पाया गया जो सब्जियां नहीं खाते थे। इनमें विटामिन K, ल्यूटिन और फोलेट प्रचुर मात्रा में होता हैं जो संज्ञानात्मक गिरावट को रोकता हैं।
डिस्क्लेमर : यह लेख वैज्ञानिक शोधों और सामान्य पोषण संबंधी जानकारी पर आधारित है। केवल डाइट बदलने से दिमागी बीमारियां ठीक नहीं होतीं। यदि आपको याददाश्त में अचानक कमी या गंभीर मानसिक थकान महसूस हो, तो किसी न्यूरोलॉजिस्ट या मनोवैज्ञानिक से सलाह लें।



