उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान विपक्षी पार्टियों पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक की पार्टियों के नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके नेता लोकसभा में महिलाओं के सम्मान को नज़रअंदाज़ कर रहे थे।

मुख्यमंत्री धामी ने रामायण का संदर्भ देते हुए कहा कि जिस तरह से विपक्षी नेता नारी शक्ति के विषय पर बोल रहे थे, उसे देखकर उन्हें लंकापति रावण की याद आ रही थी, जिसने माता सीता का अपमान किया था और अंततः उसका विनाश हुआ था।
बता दें, धामी ने इस विशेष सत्र का आयोजन ‘नारी सम्मान, लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर किया था। उनका कहना था कि यह सत्र महिलाओं के अधिकारों और उनके समाज में उचित प्रतिनिधित्व की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने विपक्ष से महिला आरक्षण के लिए समर्थन देने की अपील की और कहा कि भारत सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन बिल 2023’ को पारित किया था, जिसे 2029 तक लागू किया जाना था, लेकिन इस मुद्दे को संसद में अटकाने का प्रयास किया गया।
वहीं, इस सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक यशपाल आर्य ने भी महिलाओं के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में पारित किया गया था, जिसमें 33 प्रतिशत आरक्षण की वकालत की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे लागू करने में देरी की है। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस का समर्थन दोहराया और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में इस बिल की अहमियत पर ज़ोर दिया।
यह विशेष सत्र संविधान के 131वें संशोधन पर आधारित था, जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण और डिलिमिटेशन से जुड़ी चर्चा की गई थी। इस बिल में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शामिल था।
विपक्षी दलों ने इस बिल का समर्थन किया, लेकिन वे डिलिमिटेशन बिल के खिलाफ थे। उनका मानना था कि वर्तमान लोकसभा की सीटों पर ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए।



