मध्यपूर्व में जारी ईरानइजरायलअमेरिका तनाव अब वैश्विक आर्थिक संकट में बदलता जा रहा है. तेल सप्लाई बाधित होने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ गई है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब देशों और आम लोगों पर पड़ रहा है.

क्या तेल की जंग बनाएगी गरीब? ईरान- अमेरिका युद्ध से 3.25 करोड़ लोग गरीबी में धकेले गए!
क्या तेल की जंग बनाएगी गरीब? ईरान- अमेरिका युद्ध से 3.25 करोड़ लोग गरीबी में धकेले गए!

United Nations Development Programme की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष की वजह से 32.5 मिलियन लोग गरीबी की रेखा के नीचे जा चुके हैं या जाने की कगार पर हैं.

Hormuz संकट से बढ़ी वैश्विक परेशानी

तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता Strait of Hormuz इस समय तनाव का केंद्र बना हुआ है. यहां अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की जवाबी कार्रवाई से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर ये हुआ कि ग्लोबल ऑयल सप्लाई घट गई. शिपिंग और बीमा लागत बढ़ गई. UNDP की 27 पेज की रिपोर्ट में इस संकट को Triple Shock बताया गया है. इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 90120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं.वही फर्टिलाइजर 1520% महंगे होने से खाद्य कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे गरीब देशों में भूख का खतरा बढ़ा है. इसके साथ ही मुद्रास्फीति बढ़ रही है और आर्थिक विकास धीमा पड़ रहा है.

भारत पर क्या असर?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. लगभग 55% कच्चा तेल मध्य पूर्व से आता है, जिसमें Hormuz Strait का रास्ता अहम है:

Gulf में काम करने वाले भारतीयों की remittances प्रभावित
ट्रांसपोर्ट महंगा होने से हर चीज की कीमत बढ़ने का खतरा
फर्टिलाइजर महंगे होने से खेती और खाद्य महंगाई पर असर
सूत्रों के अनुसार, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत की महंगाई 0.20.25% तक बढ़ सकती है.

सबसे ज्यादा असर किन पर?

अफ्रीका और एशिया के गरीब देश
छोटे द्वीपीय राष्ट्र
ऊर्जा आयात पर निर्भर देश

UN के मुताबिक, फर्टिलाइजर संकट के चलते 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग भुखमरी के खतरे में आ सकते हैं.

सप्लाई चेन पर असर

सैकड़ों तेल टैंकर रास्ते में फंसे
शिपिंग इंश्योरेंस महंगा
ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित
इससे रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो रही हैं.

UNDP का कहना है कि करीब 6 बिलियन डॉलर की मदद से 3.2 करोड़ लोगों को गरीबी में जाने से रोका जा सकता है
कैश ट्रांसफर और एनर्जी सब्सिडी जरूरी लेकिन कई विकासशील देशों के पास पहले से भारी कर्ज होने के कारण यह आसान नहीं है. जब तक Strait of Hormuz में तनाव कम नहीं होता और तेल सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक यह संकट जारी रहने की आशंका है. यह युद्ध अब सिर्फ मध्यपूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट में बदल चुका है और इसकी सबसे बड़ी कीमत गरीब और आम लोग चुका रहे हैं.