ईरान की करेंसी ‘रियाल’ की कीमत गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है. इसका सबसे बड़ा कारण वॉशिंगटन का तेहरान की इकॉनमी को कमज़ोर करने के लिए अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाना है. आज की तारीख में, फ्री मार्केट में 1 डॉलर की कीमत 20 लाख रियाल से ज्यादा है. डॉलर का रेट लगभग 95 रुपए होने के कारण, 100 रुपए की कीमत लगभग 21 लाख ईरानी रियाल के बराबर है.

ईरान की इकॉनमी पहले से ही अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर दशकों से लगे अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण मुश्किलों का सामना कर रही थी. अब, ईरानइजराइल वॉर ने रियाल को और गहरे संकट में डाल दिया है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और लोगों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है.
ईरान में लोगों की खरीदने की क्षमता में कितनी तेजी से गिरावट आई है, इसे समझने के लिए हम रोजमर्रा की चीजों की मौजूदा कीमतों और 21 लाख ईरानी रियाल में क्याक्या खरीदा जा सकता है, इस पर नजर डालते हैं. अल जजीरा की तेहरान में कीमतों के विश्लेषण के अनुसार, युद्ध से पहले 20 लाख रियाल — जो लगभग 1 डॉलर या 95 डॉलर के बराबर है — में लगभग 4 किलो टमाटर, आधा किलो चिकन और एक लीटर से थोड़ा कम कुकिंग ऑयल खरीदा जा सकता था. आज, उतनी ही रकम में आपको इसका आधा ही मिल सकता है.
ईरान में 100 रुपए में क्या खरीदा जा सकता है?
100 रुपए या लगभग 21 लाख रियाल में, अब आप 2 किलो टमाटर, लगभग 25 ग्राम चिकन और आधे लीटर से कम कुकिंग ऑयल खरीद सकते हैं. अल जजीरा के डेटा के अनुसार, रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण, टमाटर की औसत कीमत में 71 फीसदी की वृद्धि हुई है, चिकन 74 फीसदी महंगा हो गया है और कुकिंग ऑयल की कीमत में 177 फीसदी का उछाल आया है. इसका असर दवाओं पर भी बुरी तरह पड़ा है. इंसुलिन की कीमत में 642 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पैरासिटामोल 93 फीसदी महंगी हो गई है. बेबी फॉर्मूला, जिस पर सरकार काफी सब्सिडी देती है, उसकी कीमत भी 95 फीसदी बढ़ गई है.
लाखों रियाल, लेकिन घटती खरीदने की क्षमता
रियाल की कीमत कम होने के बावजूद, अधिकारी मजदूरी को कीमतों के हिसाब से बढ़ाने में नाकाम रहे हैं. ईरान सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी अभी 16.6 करोड़ रियाल है, जो अल जजीरा द्वारा बताए गए एक्सचेंज रेट के हिसाब से लगभग 82 डॉलर के बराबर है. सरकारी मदद और फायदों को मिलाकर यह रकम 220 मिलियन रियाल से कम या लगभग 108 डॉलर बैठती है. औसत मासिक वेतन की तुलना खानेपीने की चीजों, कपड़ों और दवाओं जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से करने पर पता चलता है कि एक ईरानी परिवार कितना कम खर्च कर सकता है.
महीने की सैलरी से घ चलाना हुआ मुश्किल
35 वर्षीय अफसानेह ने अल जजीरा को बताया कि उनके परिवार का साप्ताहिक राशन का बिल 20 से 30% तक बढ़ गया है. अफसानेह ने कहा कि युद्ध से पहले, हम तीन या छह महीने बाद क्या करना है, इस बारे में सोच सकते थे, लेकिन अब हमारी एकमात्र चिंता यह है कि हम अपनी मौजूदा आय से महीने के आखिर तक कैसे गुजारा करें. ईरान की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी और युद्ध ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. लाखों ईरानियों के लिए असली सवाल अब यह नहीं है कि कीमतें कितनी बढ़ गई हैं, बल्कि यह है कि मासिक वेतन से भोजन, आवास और अन्य जरूरी चीजों का खर्च कैसे पूरा किया जाए.



