इरफान खान भारतीय सिनेमा के बेस्ट कलाकारों में से एक हैं। उन्होंने एक्टिंग को सिर्फ परफॉर्मेंस नहीं बल्कि अनुभव बना दिया। आज उन्हें दुनिया को अलविदा कहे पूरे 6 साल हो गए। 29 अप्रैल 2020 को उनका कैंसर की बीमारी से निधन हो गया था। आज उनकी डेथ एनिवर्सरी पर उनके अभिनय के बारे में कुछ खास बातें जानते हैं।

उन्होंने न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड तक एक खास पहचान हासिल की थी। इरफान खान ने अपने अभिनय करियर की नींव दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से एक्टिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद रखी। उन्होंने 1980 के दशक के अंत में टेलीविजन की दुनिया से अपने करियर की शुरुआत की।
इस दौर में उन्होंने कई चर्चित टीवी धारावाहिकों में काम किया, जिनमें ‘चाणक्य’, ‘भारत एक खोज’, ‘बनेगी अपनी बात’ और ‘चंद्रकांता’ जैसे लोकप्रिय शोज शामिल हैं। इन सीरियल्स में उनके अभिनय ने धीरेधीरे उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलानी शुरू की।
इसके बाद 1988 में इरफान खान ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उन्हें फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में एक छोटा सा रोल मिला। हालांकि यह भूमिका बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन यह उनके सिनेमा करियर की शुरुआत साबित हुई और यहीं से उनके लंबे और शानदार फिल्मी सफर की नींव पड़ी।
इरफान खान ने फिल्मों में हमेशा ऐसे किरदार चुने जो आम इंसान की भावनाओं को दर्शाते थे। चाहे ‘द लंचबॉक्स’ हो या ‘पान सिंह तोमर’, उन्होंने हर रोल में जान डाल दी। उनकी यही सादगी और नैचुरल एक्टिंग उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी।
हॉलीवुड में भी बनाई अपनी जगह
हॉलीवुड में भी इरफान ने अपनी अलग पहचान बनाई। ‘लाइफ ऑफ पाई’, ‘जुरासिक पार्क’ और ‘इन्फर्नो’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में उनके काम को खूब सराहा गया। उनकी खासियत यह थी कि वे किसी भी संस्कृति में खुद को आसानी से ढाल लेते थे और अपने किरदार को पूरी तरह जीवंत बना देते थे।
सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वो अपने अभिनय से यह सिखाते थे कि स्टारडम से ज्यादा जरूरी है सच्चा अभिनय और ईमानदारी से किया गया काम। आज उनकी डेथ एनिवर्सरी पर सिनेमा जगत उन्हें याद कर रहा है, लेकिन उनके निभाए किरदार और उनकी अदाकारी हमेशा दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेंगे।



