Vastu Tips For Temple In Balcony: घर के हर कोने में सकारात्मकता का संचार घर के मंदिर से होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सकारात्मक ऊर्जा संतुलित रहे इसके लिए जरूरी है कि घर का मंदिर सही जगह पर हो और वास्तु अनुसार हो. आजकल फ्लैट कल्चर है और लोग जगह बचाने के लिए लोग बालकनी में मंदिर स्थापित कर देते हैं. पूजा स्थान घर का सबसे पवित्र स्थान होते हैं ऐसे में उसकी दिशा, स्थान और वातावरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि घर की बालकनी में मंदिर होना चाहिए या नहीं, यह शुभ होता है या अशुभ, पूजा घर को लेकर कौन सी सावधानी बरते और इससे जुड़े वास्तु नियम क्या है.

भगवान रूठ जाएं उससे पहले जान लें बालकनी में मंदिर होना शुभ या अशुभ, नोट कर लें इससे जुड़े वास्तु टिप्स
भगवान रूठ जाएं उससे पहले जान लें बालकनी में मंदिर होना शुभ या अशुभ, नोट कर लें इससे जुड़े वास्तु टिप्स

बालकनी में मंदिर बनाना शुभ या अशुभ
घर के मंदिर को लेकर कुछ मान्यताएं हैं और कुछ नियम जिसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. एक मान्यता है कि बालकनी में मंदिर रखना ठीक नहीं है क्योंकि बालकनी घर का बाहरी हिस्सा माना गया है. जो भी सकारात्मक ऊर्जा पूजा से मिलेगी वह घर के बाहर ही रह जाएगा. ऐसे में यह सही नहीं है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार बालकनी में मंदिर बनाना अशुभ नहीं है हालांकि कुछ नियम जरूर माना चाहिए जैसे बालकनी को साफ रखें और ध्यान रखें कि बालकनी में मंदिर हो तो उसी बालकनी में भूलकर भी बाथरूम न बनाएं.

एक मान्यता ये भी है कि बालकनी घर का खुला क्षेत्र है जहां हवा, धूप और बाहरी प्रभाव सीधे घर में प्रवेश करता है ऐसे में बलकनी में मंदिर बनवाने से पहले वास्तु के कुछ नियमों को जरूरी समझ लें.

बालकनी में मंदिर हो तो बरतें ये सावधानियां
अगर बालकनी में मंदिर बनवाना ही पड़ रहा है तो कुछ सावधानियां बरतें. जैसे मंदिर को धूल और बारिश से बचाने की व्यवस्था करें. बालकनी को साफ रखें, बालकनी में जूतेचप्पल न रखे और मंदिर के पास तुलसी का पौधा जरूर रखें. फूल के पौधे लगाएं.घर के मंदिर को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें.

घर का मंदिर कहां हो?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में उत्तरपूर्व कोना यानी उत्तरपूर्व दिशा की ओर मुख वाली दीवार वाली जगह पर मंदिर बनाएं. इससे घर में शांति और सकारात्मकता फैलेगी. उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख वाली दीवार पर एक छोटा सा मंदिर स्थापित कर सकते हैं. दीवार पर लकड़ी या संगमरमर का एक छोटा मंदिर स्थापित कर सकते हैं. मंदिर के ऊपरनीचे या पास में शौचालय या शयनकक्ष की दीवार से जुड़ा न हो इसका ध्यान रखें.