वेंकट कृष्णा बी। जिसे एक दिन मैदान के गेट पर रोक दिया गया था, आज वही खिलाड़ियों के बीच ‘मैम’ कहकर सम्मान पाती हैं। यह कहानी 31 साल की रितिका श्री की है। रितिका ने भेदभाव, अस्वीकार और सिस्टम की खामियों से लड़ते हुए तमिलनाडु की पहली रजिस्टर्ड ट्रांसजेंडर अंपायर बनने का मुकाम हासिल किया।

जिसे गेट पर रोका गया, वही बनीं मैदान की ‘मैम’: तमिलनाडु की पहली ट्रांसजेंडर अंपायर रितिका श्री की कहानी
जिसे गेट पर रोका गया, वही बनीं मैदान की ‘मैम’: तमिलनाडु की पहली ट्रांसजेंडर अंपायर रितिका श्री की कहानी

कोयंबटूर में पहले ही मैच से पहले उन्हें जिस अपमान का सामना करना पड़ा, उसने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बना दिया। 300 से ज्यादा मैचों का अनुभव, अपनी पहचान के लिए संघर्ष और क्रिकेट के प्रति जुनून, इन सबने मिलकर रितिका को उस क्रीज तक पहुंचाया, जहां आज उनका हर फैसला सम्मान के साथ सुना जाता है।

पिछले सितंबर में कोयंबटूर के एक जानेमाने शिक्षण संस्थान में एक सिक्योरिटी गार्ड ने रितिका श्री को गेट से अंदर नहीं जाने दिया। वह एक क्रिकेट मैच में अंपायरिंग करने आई थीं। एक साल पहले अपना जेंडर बदलने के बाद यह उनका पहला मैच था।

रितिका श्री ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘‘सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे अंदर भी नहीं आने दिया। सबसे पहले उसने मुझे वहां से भगा दिया, लेकिन उस दिन मेरे अंदर से किसी चीज ने मुझसे कहा कि मैं उसका सामना करूं और उससे कहूं कि मैं यहां अंपायर बनने आई हूं।’’

रितिका ने बताया, ‘‘मैं लड़तेझगड़ते अंदर तो पहुंच गई, लेकिन इससे पहले कि मैं मैदान में उतर पाती, सुरक्षाकर्मियों का एक और ग्रुप आ गया और उन्होंने मुझे रोक लिया।’’ कुछ फोन कॉल किये गए। आखिरकार मंजूरी मिल ही गई, लेकिन तब तक रितिका कई तरह के जज्बातों से गुजर चुकी थीं।

रितिका ने बताया, ‘‘उस सुबह मैं अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाई। मेरे लिए यह एक बहुत बड़ा पल था। भीख मांगने या यौन शोषण का शिकार होने के बजाय एक इज्जतदार जिंदगी की शुरुआत करना, लेकिन फिर मुझे नामंजूरी का सामना करना पड़ा। उस सुबह मैंने अपने दिल की बात कही।’’

रितिका कहती हैं, ‘‘मैंने कुछ कड़े सवाल पूछे एक ट्रांसजेंडर इंसान आम जिंदगी क्यों नहीं जी सकता और उसके साथ बराबरी का बर्ताव क्यों नहीं हो सकता? मुझे जिस बेइज्जती का सामना करना पड़ा, उसे मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई।’’

रितिका गेट से गुजरकर मैदान में पहुंचीं। वह क्रीज पर जाकर खड़ी हो गईं। वह तमिलनाडु की पहली रजिस्टर्ड ट्रांसजेंडर अंपायर हैं। उनकी उम्र 31 साल है। रितिका के अंपायर बनने की शुरुआत 2019 में मोहाली में एक IPL मैच के दौरान हुई थी।

रितिका तब 25 साल की थीं और मुथु राज नाम से जानी जाती थीं। उन्होंने अंपायरों को काम करते देखा और चुपचाप तय कर लिया कि वह भी यही करना चाहती हैं। साल 2020 के लॉकडाउन में उनकी IT की नौकरी चली गई। वह सलेम चली गईं, जहां अंपायरिंग उनका फुलटाइम पेशा बन गया।

उस समय रितिका एक पुरुष के तौर पर ही रह रही थीं। रितिका कहती हैं, ‘‘अगर मुझे एक प्रोफेशनल अंपायर बनना था तो मुझे जिला स्तर से शुरुआत करनी पड़ती और सलेम जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने इसमें मेरी बहुत मदद की। शांतिभूषण और पार्थसारथी दो सीनियर अंपायर थे। उन्होंने मेरी मदद की। वे ही पहले ऐसे लोग थे जिनसे मैंने अपने अंदर हो रहे बदलाव के बारे में बात की।’’

रितिका सलेम और नामक्कल में 300 से ज्यादा मैचों में अंपायरिंग कर चुकी हैं। हर मैच उनके रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। जेंडर बदलने के इलाज की वजह से उन्हें एक साल तक खेल से दूर रहना पड़ा। जब वह लौटीं तो उनके सामने बड़ी समस्या थी। रितिका ने बताया, ‘‘मैच अधिकारियों की बात करें तो इसमें ‘थर्ड जेंडर’ जैसी कोई चीज नहीं होती। इसमें या तो पुरुष होते हैं या फिर महिलाएं।’’

रितिका श्री ने बताया, ‘‘हालांकि, जब मैंने खेल जारी रखने की इच्छा जताई तो कोयंबटूर जिला क्रिकेट संघ ने मेरी बहुत मदद की। अंपायर समिति ने पूरी तरह से मेरे रिकॉर्ड को आधार बनाया। मैंने सलेम और नामक्कल में 300 से ज्यादा मुकाबलों में अंपायरिंग की थी, इसलिए उन्होंने बिना किसी भेदभाव के मुझे शामिल कर लिया।’’

वापसी वाले मैच से पहले उनका पैर टूट गया था। फिर भी वह फ्रेंडली मैचों में अंपायरिंग के लिए खड़ी रहीं, ताकि दूसरे अंपायर उन पर भरोसा कर सकें। उन्होंने पुरुष अंपायरों और खिलाड़ियों के साथ घुलनेमिलने के लिए ‘आइसब्रेकिंग सेशन’ भी किए। रितिका ने बताया, ‘‘मैं उनका भरोसा जीतना चाहती थी, ताकि मैदान के बीच में सब कुछ आसानी से हो सके।’’ फिर कोयंबटूर की बारी आई।

गेट पर हुई उस घटना ने CDCA को कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने क्लब मालिकों, मैच पदाधिकारियों, खिलाड़ियों और वेन्यू ओनर्स के साथ ‘जेंडरसेंसिटिविटी सेशन’ आयोजित किए। जिस संस्था ने रितिका को लौटा दिया था, अब वहां मैच नहीं होते। अब जब भी उन्हें किसी लीग मैच में अंपायरिंग के लिए भेजा जाता है तो मैच से एक दिन पहले ही CDCA की ओर से संदेश भेज दिया जाता है रितिका श्री अंपायरिंग करेंगी। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।’’