लखनऊ की एक साधारण सी गली से निकलकर एक साधारण लड़की सारा मोइन ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे देश को प्रेरित किया है। 20 वर्षीय सारा ने ISC कक्षा 12 की परीक्षा में 98.7 प्रतिशत अंक हासिल कर क्राइस्ट चर्च कॉलेज की टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी यह सफलता केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और परिवार के अटूट समर्थन की जीवंत कहानी है।

सारा की मार्कशीट उनकी मेहनत और प्रतिभा को दर्शाती है, जिसमें भूगोल और मास मीडिया एंड कम्युनिकेशन में 100 में से 100 अंक, अंग्रेजी में 98, इतिहास में 97 और मनोविज्ञान में 96 अंक शामिल हैं। लेकिन इन अंकों के पीछे एक ऐसी यात्रा छिपी है, जिसने जीवन की कठिनतम परिस्थितियों को भी चुनौती दी।
सारा का जन्म सामान्य रूप से हुआ था, लेकिन चार साल की उम्र में उनकी जिंदगी ने अचानक मोड़ ले लिया, जब उन्हें एक गंभीर बीमारी “सारकॉइडोसिस” का सामना करना पड़ा। इस बीमारी के कारण धीरेधीरे उनकी देखने, सुनने और बोलने की क्षमता प्रभावित हो गई। परिवार ने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद सारा के लिए शिक्षा का रास्ता कठिन हो गया। 2014 में जब वह केवल 6 साल की थीं, तब कई स्कूलों ने उन्हें दाखिला देने से मना कर दिया। यह वह समय था जब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी शिक्षा को जारी रखना था।
सारा की मां जूली अहमद, जो खुद शिक्षिका हैं, ने हार नहीं मानी और घर पर ही उनकी पढ़ाई शुरू करवाई। उनके पिता मोइन अहमद ने बेटी की देखभाल के लिए समय से पहले नौकरी छोड़ दी, ताकि वह सारा के भविष्य पर पूरा ध्यान दे सकें। वहीं उनके भाई जोहेब ने भी पढ़ाई में सहयोग दिया।
परिवार ने सारा को कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया और उनकी शिक्षा को जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। मां उन्हें स्पर्श के माध्यम से अक्षर सिखाती थीं, जिससे वह शब्दों को समझती थीं।
सारा के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब क्राइस्ट चर्च कॉलेज ने समावेशी शिक्षा को अपनाया और उन्हें प्रवेश दिया। यहां उनकी मुलाकात स्पेशल एजुकेटर सलमान अली काज़ी से हुई, जिन्होंने उनकी क्षमता को पहचाना और तकनीकी सहायता के माध्यम से उनकी पढ़ाई को आसान बनाया।
सारा ने ऑर्बिट रीडर और ब्रेल डिस्प्ले जैसे उपकरणों की मदद से पढ़ाई की, जिससे वह किताबों को स्पर्श के माध्यम से पढ़ सकीं। परीक्षा में भी उन्होंने ब्रेल तकनीक के जरिए उत्तर दिए।
कक्षा 10 में 95 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद सारा का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने कक्षा 12 में 98.7 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सभी को चौंका दिया।
उनकी यह सफलता साबित करती है कि शारीरिक सीमाएं कभी भी सपनों को रोक नहीं सकतीं। सारा आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो यह संदेश देती हैं कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।



