अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक ताजा वर्किंग पेपर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद सकारात्मक तस्वीर पेश की है. आम तौर पर यह सवाल उठता है कि सरकारी कामकाज के ऑनलाइन होने या ‘डिजिटल इंडिया’ की पहलों से सड़क किनारे या छोटी फैक्ट्रियों में काम करने वाले आम कारोबारी को क्या फायदा हुआ है? IMF के अर्थशास्त्रियों सोमनाथ शर्मा और केनिची उएदा की रिपोर्ट ने इसका सटीक जवाब दिया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, जिन राज्यों ने अपने प्रशासनिक ढांचे में तेजी से डिजिटल सुधार लागू किए हैं, वहां सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की उत्पादकता में जबरदस्त इजाफा दर्ज किया गया है.

सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म… काम ‘ऑनलाइन’ होने से छोटे कारोबारियों की कमाई में आया भारी उछाल
सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म… काम ‘ऑनलाइन’ होने से छोटे कारोबारियों की कमाई में आया भारी उछाल

फाइलों के जाल से मुक्ति, मुनाफे को मिली उड़ान

भारत में व्यापारिक माहौल को सुधारने के लिए साल 201011 से लेकर 201415 के बीच बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए गए. इन सुधारों का मुख्य जोर व्यापार से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को कागज से निकालकर कंप्यूटर तक लाने पर था. बड़ी कंपनियों के पास संसाधनों और कर्मचारियों की फौज होती है, इसलिए उनके लिए नौकरशाही की अड़चनों से पार पाना आसान होता है. लेकिन, एक छोटे कारोबारी के लिए हर एक लाल फीताशाही भारी आर्थिक और मानसिक लागत लेकर आती है. रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डिजिटल सिस्टम लागू होने से प्रशासनिक अनुपालन का यह बोझ काफी कम हुआ है. ऑनलाइन टैक्स भरने से लेकर ऑटोमेटेड अप्रूवल तक की सुविधाओं ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है और ‘अंडर द टेबल’ होने वाले खर्चों पर लगाम कसी है.

देश की अर्थव्यवस्था का असली ‘साइलेंट’ इंजन

यह समझना जरूरी है कि भारत के विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी इन्हीं सूक्ष्म और लघु उद्योगों की है. इतना ही नहीं, यह सेक्टर करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है और देश के कुल निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत का बड़ा योगदान रखता है. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर उद्यम 1956 के कंपनी अधिनियम के तहत औपचारिक रूप से पंजीकृत भी नहीं हैं.

’98पॉइंट एक्शन प्लान’ ने बदला खेल

कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में साल 2014 में राज्यों ने ’98सूत्रीय कार्य योजना’ पर सहमति जताई थी. इस बड़े कदम के तहत मुख्य रूप से छह मोर्चों पर काम किया गया. कर प्रणाली, निर्माण परमिट, पर्यावरण और श्रम नियमों का पालन, सरकारी निरीक्षण, वाणिज्यिक विवाद और सिंगलविंडो क्लीयरेंस. जिन राज्यों ने इन छह पैमानों पर तेजी से डिजिटल प्रक्रियाएं लागू कीं, वहां के छोटे उद्योगों के कुल उत्पादन में सीधा उछाल देखने को मिला. डिजिटल उपकरणों ने सरकारी फैसलों में होने वाली मनमानी को खत्म कर दिया.

पलायन की जरूरत नहीं, अपनी जमीन पर ही मिला विस्तार

अध्ययन में एक और अहम बात सामने आई है. अक्सर यह माना जाता है कि बेहतर सुविधाओं की तलाश में कारोबारी एक राज्य से दूसरे राज्य की तरफ पलायन कर सकते हैं. लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि सूक्ष्म उद्यमों ने डिजिटल सुधारों का फायदा उठाने के लिए अपना ठिकाना नहीं बदला. इन छोटे उद्यमों को अपने ही राज्य में हुए सिस्टम के डिजिटलीकरण का सीधा लाभ मिला. इस पूरी प्रक्रिया ने छोटेबड़े सभी व्यापारों के लिए बाजार में एक समान अवसर तैयार कर दिया है, जिससे भारत का आम कारोबारी बिना किसी अड़चन के अपने व्यापार पर ध्यान केंद्रित कर पा रहा है.