उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में इस समय आसमान से आग बरस रही है. पारा चढ़ने के साथ ही हर घर में एसी और कूलर पूरी क्षमता से चलने लगे हैं, जिसके चलते बिजली की खपत ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इसी बीच, सोशल मीडिया पर कोयले की कमी और ब्लैकआउट की अफवाहों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है. सवाल उठने लगे कि क्या इस भीषण गर्मी में हमें लंबे पावर कट का सामना करना पड़ेगा? इस पर अब सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि देश में कोई बिजली संकट नहीं है और हमारा पावर ग्रिड पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है.

थर्मल प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त भंडार
सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से नेशनल ग्रिड पर भारी दबाव और थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कमी की खबरें वायरल हो रही थीं. इन भ्रामक दावों पर विराम लगाते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के बिजली घरों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. वर्तमान में 53.702 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जो मौजूदा जरूरतों को निर्बाध रूप से पूरा करने के लिए काफी है. इसके अलावा, 2 मई 2026 को देश ने बिना किसी कटौती के 229 गीगावाट की पीक पावर डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा किया. ग्रिड संचालन को तय मानकों के तहत मैनेज किया जा रहा है और फ्रीक्वेंसी कंट्रोल सिस्टम सक्रिय हैं, जिससे इसकी स्थिरता हर हाल में सुनिश्चित हो रही है.
टूट रहे हैं खपत के रिकॉर्ड, फिर भी सप्लाई है दुरुस्त
गर्मी के कहर को देखते हुए बिजली मंत्रालय ने भी विस्तार से आंकड़े जारी किए हैं. अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से ही मांग लगातार बढ़ रही है. 25 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:38 बजे बिजली की मांग अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 256.1 गीगावाट पर पहुंच गई थी. राहत की बात यह है कि इस ऐतिहासिक मांग को बिना किसी रुकावट के पूरा किया गया. यही नहीं, अपनी जरूरतें पूरी करने के साथसाथ पड़ोसी देशों को भी बिजली का निर्यात जारी रहा.
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार 1 से 27 अप्रैल के बीच बिजली की खपत में 8 से 9 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है. हालांकि रविवार, 26 अप्रैल को व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियां कम होने तथा कुछ इलाकों में धूल भरी आंधी व बारिश के चलते मांग में थोड़ी नरमी जरूर दर्ज की गई. अगर पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो खपत का यह ग्राफ साफ समझ आता है. जहां सितंबर 2023 में पीक डिमांड 243.27 गीगावाट थी, वहीं 2024 के मई महीने में यह 250 गीगावाट तक पहुंच गई थी. पिछले साल, यानी 2025 में जून के महीने में अधिकतम मांग 242.77 गीगावाट दर्ज की गई थी.
आने वाले दिनों की क्या है तैयारी?
भारतीय मौसम विभाग ने इस साल भीषण लू और बेहद गर्म गर्मियों का अलर्ट जारी किया है. इसके मद्देनजर केंद्र ने भी सभी राज्यों को अस्पतालों में ‘हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट यूनिट’ और एम्बुलेंस तैयार रखने के सख्त निर्देश दिए हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मई और जून में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ेगा, जिससे बिजली की मांग 270 गीगावाट के करीब पहुंच सकती है.
इस भारी भरकम चुनौती से निपटने के लिए सरकार आश्वस्त नजर आ रही है. बिजली मंत्रालय का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान उत्पादन क्षमता में लगभग 65 गीगावाट का इजाफा किया गया है. इसी मजबूत बुनियादी ढांचे के दम पर सिस्टम पूरी तरह तैयार है, ताकि गर्मी के इस मुश्किल मौसम में आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के बिजली मिलती रहे.



