हिमाचली खबर: तमिलनाडु में एक्टर विजय का मुख्यमंत्री बनना तय है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम को कांग्रेस के बाद 3 छोटी पार्टियां भी समर्थन देने के लिए राजी हो गई हैं.TVK को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वह सरकार बना लेगी. इससे पहले सोशल मीडिया पर यह भी खबर फैली थी कि तमिलनाडु की दो बड़ी पार्टियांं डीएमके और AIADMK गठबंधन कर सकती हैं.हालांकि दोनों की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया. तमिलनाडु में 3 राजनीतिक पार्टियां ऐसी हैं, जिनके नाम में द्रविड़ जुड़ा हुआ है.

कौन है द्रविड़? DMK हो या AIADMK, राजनीतिक दलों के नाम में शामिल, तमिलनाडु में इसकी गहरी हैं जड़ें​
कौन है द्रविड़? DMK हो या AIADMK, राजनीतिक दलों के नाम में शामिल, तमिलनाडु में इसकी गहरी हैं जड़ें​

तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरलम के सीमावर्ती इलाकों में द्रविड़ों का बोलबाला है. संभवतः इसीलिए DMK और AIADMK नाम में द्रविड़ जुड़ा हुआ है. एक सीट जीतने वाली डीएमडीके भी इस नाम के महत्व को जानती है, इसीलिए उसने भी पार्टी के नाम में द्रविड़ को जगह दिया हुआ है.

इसी बहाने जानना रोचक होगा कि आखिर कौन हैं द्रविड़, क्या है दक्षिण भारत में इनका इतिहास? जिसका इस्तेमाल राजनीतिक दलों ने पार्टी के नाम में कर रखा है.

द्रविड़ शब्द का मतलब

द्रविड़ शब्द का प्रयोग आज कई अर्थों में होता है. यह एक भाषापरिवार के लिए भी आता है. यह एक सांस्कृतिक पहचान भी है और दक्षिण भारत की राजनीति में यह एक बड़े सामाजिक आंदोलन का नाम भी बन गया है. सरल शब्दों में कहें, तो द्रविड़ कोई एक ही जाति या नस्ल का सीधा नाम नहीं है. इतिहासकार और भाषाविद इसे अधिकतर भाषाई और सांस्कृतिक शब्द मानते हैं. दक्षिण भारत की तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और कुछ अन्य भाषाएं द्रविड़ भाषापरिवार में आती हैं. इसी कारण द्रविड़ शब्द दक्षिण भारत की पहचान से जुड़ा हुआ है.

AIADMK का पूरा नाम है अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम.

कहां हैं द्रविड़ शब्द की जड़ें?

द्रविड़ शब्द बहुत पुराना है. संस्कृत ग्रंथों में द्रविड़, द्रमिल, द्राविड जैसे रूप मिलते हैं. कई विद्वान मानते हैं कि यह शब्द तमिल से भी जुड़ता है. समय के साथ इसका अर्थ फैलता गया. 19 वीं सदी में मिशनरीभाषाविद रॉबर्ट काल्डवेल ने अपनी किताब ए कंपरेटिव ग्रामर ऑफ द द्रविनियन ओर साउथ इंडियन फॅमिली लैंग्वेजेस में दक्षिण भारतीय भाषाओं को एक अलग परिवार के रूप में समझाया है. इस पुस्तक ने द्रविड़ शब्द को आधुनिक बौद्धिक दुनिया में बहुत प्रसिद्ध किया. इसके बाद यह केवल भाषा का शब्द नहीं रहा. यह पहचान और राजनीति का शब्द भी बन गया.

क्या द्रविड़ एक नस्ल हैं?

पुराने समय में कुछ यूरोपीय विद्वानों ने मानव समाज को नस्लों में बांटने की कोशिश की थी. उसी दौर में आर्य और द्रविड़ को कभीकभी नस्ल की तरह भी बताया गया. लेकिन आज इतिहास, मानवशास्त्र और आनुवंशिकी के अधिकतर गंभीर अध्ययन इस तरह की सीधी और कठोर नस्ली रेखा को सही नहीं मानते. आज बेहतर समझ यह है कि द्रविड़ मुख्य रूप से भाषाई और सांस्कृतिक शब्द है. दक्षिण भारत का समाज बहुत मिश्रित रहा है. यहां अनेक समुदाय, जातियां, राजवंश और परंपराएं रही हैं. इसलिए द्रविड़ को एक ही खून, एक ही नस्ल या एक ही समुदाय में बांधना ठीक नहीं माना जाता.

द्रविड़ शैली दक्षिण भारत की एक प्रमुख मंदिर वास्तुकला है.

क्या है दक्षिण भारत का इतिहास और द्रविड़ परंपरा?

दक्षिण भारत का इतिहास बहुत पुराना है. तमिल क्षेत्र का संगम साहित्य इस इतिहास की बड़ी धरोहर है. इन रचनाओं में युद्ध, प्रेम, व्यापार, समाज और शासन के चित्र मिलते हैं. यह बताता है कि दक्षिण भारत प्राचीन काल से ही जीवंत सभ्यता का क्षेत्र था. इतिहासकार के. ए. नीलकंठ शास्त्री ने दक्षिण भारत के इतिहास को विस्तार से लिखा है. उनकी पुस्तकों से पता चलता है कि चोल, चेर और पांड्य जैसे राजवंश बहुत महत्वपूर्ण थे. इंका समुद्री व्यापार भी मजबूत था. रोम तक दक्षिण भारत के माल जाते थे. बाद में पल्लव, चोल, चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसळ और विजयनगर जैसे शक्तिशाली राज्य उभरे. इन राजाओं ने मंदिर, जलव्यवस्था, व्यापार और प्रशासन को बढ़ाया. तमिल, कन्नड़, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में साहित्य फलाफूला यानी द्रविड़ भाषाई संसार केवल भाषा नहीं था. यह एक गहरी सभ्यतागत दुनिया भी थी.

भाषा, संस्कृति और समाज, सबमें शामिल है द्रविड़

दक्षिण भारत में भाषा पहचान का बहुत बड़ा आधार रही. तमिल भाषा को विशेष सम्मान मिला. कई तमिल विद्वानों ने इसे अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली भाषा माना. इसी तरह कन्नड़, तेलुगु और मलयालम की भी अपनी समृद्ध परंपराएं हैं. मंदिर, भक्ति आंदोलन, स्थानीय देवता, लोककथाएं, शिल्पकला और संगीत ने दक्षिण भारत को विशिष्ट रूप दिया. फिर भी यह क्षेत्र कभी पूरी तरह अलगथलग नहीं रहा. उत्तर भारत, श्रीलंका, दक्षिणपूर्व एशिया और अरब दुनिया से इसके संबंध रहे, इसलिए द्रविड़ इतिहास को केवल अलगाव की कहानी मानना सही नहीं है. यह संपर्क, आदानप्रदान और स्थानीय गर्व की भी कहानी है.

आधुनिक दौर में द्रविड़ विचार कैसे बना?

आधुनिक राजनीतिक अर्थ में द्रविड़ विचार औपनिवेशिक काल में अधिक स्पष्ट हुआ. ब्रिटिश शासन में नई शिक्षा, जनगणना, नौकरियाँ और प्रतिनिधित्व की राजनीति शुरू हुई. इसी समय समाज में यह सवाल उठा कि सत्ता और शिक्षा पर किसका अधिकार है. मद्रास प्रेसिडेंसी में गैरब्राह्मण समुदायों ने महसूस किया कि प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में ब्राह्मणों की पकड़ अधिक है. इसी पृष्ठभूमि में जस्टिस पार्टी का उदय हुआ. यह गैरब्राह्मण राजनीति का शुरुआती बड़ा मंच था. इसके बाद ई. वी. रामासामी पेरियार ने सेल्फरिस्पेक्ट मूवमेंट चलाया. उन्होंने जातिव्यवस्था, ब्राह्मणवाद, अंधविश्वास और सामाजिक ऊंचनीच का विरोध किया. उन्होंने तर्क, आत्मसम्मान, स्त्रीअधिकार और सामाजिक न्याय पर जोर दिया. यहीं से द्रविड़ शब्द एक मजबूत सामाजिकराजनीतिक पहचान बना.

क्या है द्रविड़ आंदोलन का मूल संदेश?

द्रविड़ आंदोलन के मुख्य मुद्दों में सामाजिक न्याय, जातिविरोध, गैरब्राह्मण प्रतिनिधित्व, तर्कवाद, क्षेत्रीय गर्व, भाषा की रक्षा, हिंदी थोपने का विरोध आदि शामिल रहा है. यह आंदोलन खासकर तमिलनाडु में बहुत प्रभावशाली हुआ और आज भी किसी न किसी रूप में खूब फलफूल रहा है. यहां द्रविड़ शब्द केवल अतीत की पहचान नहीं था. यह वर्तमान के अधिकारों की मांग भी है.

डीएमके का पूरा नाम है द्रविड़ मुनेत्र कड़गम.

DMK के नाम में द्रविड़ क्यों है?

डीएमके का पूरा नाम है द्रविड़ मुनेत्र कड़गम. तमिल में इसका अर्थ लगभग द्रविड़ प्रगति महासंघ जैसा है. इसका गठन 1949 में सी. एन. अन्नादुरै ने किया. वे पेरियार की धारा से आए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता चुना. डीएमके ने द्रविड़ पहचान को जनतांत्रिक चुनावी राजनीति से जोड़ा. पार्टी के नाम में द्रविड़ रखने का अर्थ था कि यह पार्टी सामाजिक न्याय, दक्षिण भारतीय पहचान, तमिल स्वाभिमान और गैरब्राह्मण राजनीति की परंपरा से जुड़ी है. यह नाम जनता को बताता था कि पार्टी केवल सत्ता नहीं चाहती. वह एक सामाजिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती है.

एआईएडीएमके के नाम में द्रविड़ क्यों है?

AIADMK का पूरा नाम है अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम. यह पार्टी 1972 में एम. जी. रामचंद्रन ने बनाई. वे पहले डीएमके में थे. जब नई पार्टी बनी, तब उसके नाम में भी द्रविड़ रखा गया. इसका कारण साफ था. एआईएडीएमके भी उसी व्यापक द्रविड़ राजनीतिक परंपरा से अपनी वैचारिक वैधता लेना चाहती थी. वह यह दिखाना चाहती थी कि भले संगठन अलग है, पर सामाजिक न्याय, द्रविड़ पहचान और तमिल राजनीति की जड़ वही है. अन्ना शब्द जोड़कर इस पार्टी ने अन्नादुरै की विरासत से अपना संबंध भी जताया. इस तरह डीएमके और एआईएडीएमके के नाम में द्रविड़ होना संयोग नहीं है. यह तमिलनाडु की पूरी आधुनिक राजनीति का संकेत है.

क्या द्रविड़, केवल तमिल राजनीति है?

नहीं, पर तमिलनाडु में इसका सबसे गहरा रूप दिखा. द्रविड़ शब्द सैद्धांतिक रूप से पूरे दक्षिण भारत से जुड़ता है. लेकिन व्यावहारिक राजनीति में यह सबसे अधिक तमिलनाडु में सफल हुआ. वहीं यह एक स्थायी चुनावी और सामाजिक शक्ति बना. तेलुगु, कन्नड़ और मलयाली समाजों में भी क्षेत्रीय पहचान मजबूत रही. लेकिन वहां तमिलनाडु जैसा एकीकृत द्रविड़ आंदोलन उसी रूप में नहीं बना, इसलिए द्रविड़ राजनीति कहने पर सबसे पहले तमिलनाडु याद आता है.