हिमाचली खबर: Vat Savitri Vrat Aarti And Mantra: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस साल 16 मई को यह व्रत रखा जा रहा है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर माता सावित्री और सत्यवान का स्मरण करती हैं। वट सावित्री व्रत में पूजा के दौरान मंत्र जाप और आरती का विशेष महत्व माना गया है। वट सावित्री व्रत की पूजा के दौरान मंत्र जाप और पूजा संपन्न होने के बाद आरती करना शुभ माना जाता है। यहां पढ़िए वट सावित्री पूजा के मंत्र और आरती।

वट वृक्ष पूजा का महत्व
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं के लिए खास माना जाता है। यह व्रत अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधती हैं और परिवार की सुखशांति की कामना करती हैं।
पूजा में करें इन मंत्रों का जाप
महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय इन मंत्र का जाप कर सकती हैं। अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख के लिए इन मंत्रों का जाप लाभकारी माना गया है।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’
- ‘ॐ सती सावित्र्यै नमः’
- ‘ॐ सौभाग्य प्रदायिन्यै नमः’
आरती का भी है विशेष महत्व
पूजा के अंत में माता सावित्री की आरती करना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि आरती करने से पूजा पूर्ण होती है और देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माता सावित्री की आरती
ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री…
तुम ही रक्षक सबका, प्राणों का तुम प्राण
भक्तजन मिले सारे, नित्य करें तेरा ध्यान
ओम जय जय सावित्री, ओम जय जय गायत्री
भक्त तरसे तुम हो सभी विधि करें उपकार
अंतर्मन से सुमिर लो, सुने वो तभी पुकार,
ओम जय जय सावित्री…
भक्तों का दुख भंजन रक्षा करें आठों याम,
दिव्य ज्योति तुम्हारी, रहें सदा अविराम
ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
चारों विधि के मंत्रों का गुरु मंत्र तुम्हे कहते।
ऋषि मुनि योगी सारे गुणगान तुम्हारा करें।
ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री…
हृदय विराजो हे मां, भटक न जाऊं किसी ओर
ले लो अपनी शरण में, न छूटे कभी डोर।
ओम जय जय सावित्री। ओम जय जय गायित्री।।
अपनी अनुपम तेज से जग पावन करती।।
ओम जय जय सावित्री…



