हिमाचली खबर: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने की वजह से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल अगले हफ्ते 26 मई को खत्म होने जा रहा है. ऐसे में सरकार प्रशासक समिति के माध्यम से मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है. पंचायती राज विभाग ने शासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेज भी दिया है कि ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक समिति के रूप में बागडोर सौंपी जाए.

प्रदेश की बीजेपी सरकार इन लोगों के कार्यकाल बढ़ाकर उनकी हमदर्दी हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है. कई ग्राम प्रधानों ने कल सोमवार को लखनऊ के जीपीओ पर धरना प्रदर्शन किया था. इन प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि या तो उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए या उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किया जाए.
तो फिर कब होंगे चुनाव?
प्रधानों के बीच पहुंचे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने प्रदर्शनकारियों को यह आश्वासन दिया था कि जो भी आपकी मांगे हैं उसकी गंभीरता के साथ सरकार विचार करे. साथ ही प्रधानों को लड्डू खिलाकर और पानी भी पिलाया था. तब उन्होंने प्रधानों से कहा, “गर्मी बहुत है, आप लोग पानी पीते रहिए मैं पानी की व्यवस्था भी करा दे रहा हूं.” बृजेश पाठक को अपने बीच प्रधानों ने कहा कि हमारी मांगों पर डिप्टी सीएम ने कहा कि विचार होगा. हमारी उनके साथ बातचीत बेहद सकारात्मक रही.
माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाएंगे. इस फैसले से चुनाव की तैयारी में लगे नए चेहरों को झटका लग सकता है, जबकि मौजूदा प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को फायदा मिलेगा.
OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट
इस बार पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नगर निकाय चुनावों की तर्ज पर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर आरक्षण तय होगा. आयोग का कार्यकाल 6 महीने रखा गया है.
आयोग की नियुक्ति जल्द होने के आसार
आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति इस महीने के अंत या जून के पहले हफ्ते तक होने की संभावना है. आयोग पिछड़ा वर्ग की समकालीन स्थिति, आंकड़ों का अध्ययन और सर्वेक्षण कर आरक्षण तय करेगा.
2021 के पंचायत चुनाव में रैपिड सर्वे के आधार पर आरक्षण तय किया गया था, जबकि इस बार अधिक व्यापक और कानूनी रूप से मजबूत प्रक्रिया अपनाई जा रही है. राज्य निर्वाचन आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाकर 10 जून 2026 कर दी है.
चुनाव से पहले पंचायत चुनाव असंभव
इससे पहले साल 2021 में पंचायत चुनाव 4 चरणों में अप्रैलमई में कराए गए थे. विशेषज्ञों का मानना है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट तैयार होने में समय लगेगा. यदि आयोग नवंबर तक रिपोर्ट देता है तो पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराना मुश्किल होगा.
फिलहाल सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही समय पर चुनाव कराने को लेकर शांत हैं. मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है. सरकार अंतिम फैसला अदालत के निर्देशों और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए लेगी.



