हिमाचली खबर: Malmas and Kharmas Difference: अभी मलमास यानी अधिक मास चल रहा है। बहुत से लोग मलमास और खरमास को एक समझ लेते हैं लेकिन दोनों का महत्व अलगअलग होता है। ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टि से इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। हालांकि मांगलिक कार्य मलमास और खरमास दोनों में ही नहीं किए जाते हैं। यहीं वजह है कि लोग खरमास और मलमास को एक मान रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि इन दोनों माह में क्या अंतर है।

क्या आप भी खरमास और मलमास को एक समझते हैं? दोनों में होता है बड़ा अंतर, तुरंत दूर कर लीजिए कंफ्यूजन​
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खरमास क्या होता है? 

तो हम आपको सबसे पहले बताते हैं खरमास के बारे में। खरमास साल में दो बार आता है, एक दिसंबरजनवरी के बीच में। दूसरी बार मार्च और अप्रैल के बीच में खरमास रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों यानी धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तब खरमास लगता है। खरमास हर साल आता है। सूर्य जब मीन या धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो उनका तेज कम हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य के लिए सूर्य का तेज होना बहुत ही अच्छा माना जता है। इसी वजह से खरमास के दौरान विवाह और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 

मलमास क्या होता है?

मलमास के महीने में भौतिक मांगलिक कार्य बंद रहते हैं, लेकिन इसे आध्यात्मिक रूप से बेहद पवित्र महीना माना जाता है। इस माह में तुलसी पूजा, दीपदान, श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और दानपुण्य करने से हजार गुना फल मिलता है।

मलमास जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी जाता है। इसका संबंध सूर्य और चंद्रमा के दिनों के अंतर को पाटने से है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है और सौर वर्ष 365 दिनों का। इस प्रकार हर साल दोनों कैलेंडर में 11 दिनों का अंतर आ जाता है। इस 11 दिनों के अंतर को बराबर करने के लिए हर तीन साल में हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को मलमास या अधिक मास कहते हैं।

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास महीने का कोई स्वामी नहीं था, जिसके कारण इसे ‘मलमास’ यानी अपवित्र महीना कहा गया और इसमें शुभ कार्य रोक दिए गए। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया, जिसके बाद इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाने लगा। इस महीने में पूजापाठ, तुलसी पूजा और दीपदान का अनंत गुना फल मिलता है।