हिमाचली खबर: गर्मी में प्यास बुझाने के लिए ठंडा पानी पीने का मन करता है। लेकिन बोतल में रखा पानी खौलने लगता है। ऐसे पानी से न तो प्यास बुझती और न ही पीने में अच्छा लगता है। वैसे ज्यादातर लोग गर्मियों में ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन फ्रिज के पानी के अपने कई नुकसान हैं। आयुर्वेद में फ्रिज का पानी सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसकी बजाय आप गर्मियों में पानी को ठंडा रखने के लिए मटके का इस्तेमाल करें। लेकिन 45 डिग्री तापमान पर तो मटके का पानी भी ठंडा नहीं रहता है। इसके लिए गांव देहात में ऐसे उपाय किए जाते हैं जिससे मटके का पानी भी बर्फ जैसा ठंडा रहे। अगर आप भी मटके का पानी इस्तेमाल करते हैं तो जान लें इस भीषण गर्मी में पानी को ठंडा कैसे रखें।

मटके में रहेगा बर्फ जैसा ठंडा पानी, बस कर लें ये देसी जुगाड़, 24 घंटे मिलेगा ठंडा-ठंडा पानी​
मटके में रहेगा बर्फ जैसा ठंडा पानी, बस कर लें ये देसी जुगाड़, 24 घंटे मिलेगा ठंडा-ठंडा पानी​

मटके के पानी को ठंडा कैसे रखें

मोटा सूती कपड़ा लपेट दें अगर मटका पानी को कम ठंडा कर रहा है तो इसके लिए कोई मोटा सूती कपड़ा लें। इसे मटके पर ऊपर से नीचे तक अच्छी तरह से लपेट दें। अब कपड़ो को पानी से गीला कर दें। ध्यान रखे कपड़े को सूखने नहीं देना है। इससे मटके का पानी एकदम ठंडा रहेगा।

बोरी लपेट दें अगर कपड़ा नहीं तो किसी टाट या बोरे का इस्तेमाल करें। टाट या बोरे का एक बड़ा और लंबा टुकड़ा लें और उसे मटके पर चारों ओर अच्छी तरह से लपेट दें। कपड़े की तरह ही आपको टाट को गीला रखना है। इससे मटके का पानी एकदम ठंडा बना रहेगा और पीने में भी अच्छा लगेगा।

रेत पर रखें मटको का पानी ठंडा करने का एक देसी जुगाड़ है कि आप रेत लें यानि बालू या कोई मिट्टी भी ले सकते हैं। एक बाउल में मिट्टी भर लें। अब इसमें बीच में हल्की जगह बना दें और मिट्टी को हल्का गीला कर दें। इसमें मटके को रख दें। इससे पानी ठंडा रहेगा और मटके को बाहर से नमी मिलती रहेगी। इससे मटके की सतह के छोटेछोटे छिद्र पानी को सोख लेते हैं और अंदर का पानी ज्यादा ठंडा रहता है। 

सेंधा नमक जो लोग बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना चाहते हैं वो सेंधा नमक का उपाय भी कर सकते हैं। इसके लिए पानी भरने से पहले मटके में 1 चम्मच सेंधा नमक डाल दें। अब मटके में पानी भर दें और इसे करीब 78 घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। पानी को निकालकर साफ पानी भर लें। इससे मटके की कूलिंग क्षमता बढ़ती है और पानी लंबे समय तक ठंडा रहता है।