Himachal Pradesh में बिजली सब्सिडी को लेकर लागू नई व्यवस्था ने किराए के मकानों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मई महीने के बिजली बिल आने के बाद कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि इस बार उनके बिल पहले के मुकाबले काफी ज्यादा आए हैं। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में रहने वाले किराएदारों पर इसका सीधा असर पड़ा है।

जानकारी के अनुसार सरकार की नई व्यवस्था के तहत अब एक राशन कार्ड पर केवल दो बिजली मीटरों को ही सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है। इससे अधिक मीटर होने पर बाकी कनेक्शनों पर पूरा टैरिफ लागू किया जा रहा है। ऐसे में जिन मकानों में कई किराएदार अलग-अलग मीटर इस्तेमाल कर रहे हैं, वहां अतिरिक्त मीटरों पर सब्सिडी बंद हो गई है।

बताया जा रहा है कि मकान मालिकों को पहले की तरह राहत मिल रही है, लेकिन किराएदारों को पूरा बिजली बिल भरना पड़ रहा है। इसका असर खासकर नौकरी और पढ़ाई के लिए शहरों में रहने वाले मध्यम और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है।

शिमला, धर्मशाला, मंडी, सोलन और ऊना जैसे शहरों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि बिजली बिल पहले से काफी ज्यादा आ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने बिजली की कम खपत की, फिर भी उन्हें भारी बिल चुकाना पड़ रहा है।

इस फैसले के बाद कई जगह मकान मालिक और किराएदारों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है। किराएदारों का कहना है कि अतिरिक्त बिजली खर्च का बोझ सीधे उन पर डाला जा रहा है।

इस मुद्दे के बीच चुनाव के दौरान किए गए 300 यूनिट मुफ्त बिजली के वादे की भी फिर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि जनता को राहत देने के बजाय सुविधाएं कम की जा रही हैं।

वहीं Himachal Pradesh State Electricity Board Limited का कहना है कि यह व्यवस्था सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू की गई है। बोर्ड अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त मीटरों पर हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय पूरा टैरिफ लागू किया जा रहा है।

इसके अलावा KYC प्रक्रिया को लेकर भी कई उपभोक्ताओं ने शिकायतें दर्ज करवाई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उनके नाम से ऐसे मीटर जुड़े दिखाए जा रहे हैं, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। विभाग ने उपभोक्ताओं से रिकॉर्ड अपडेट करवाने की अपील की है।