हिमाचली खबर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के बाहुबलियों और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के खिलाफ सख्त निर्णय लिया है। कोर्ट ने कुल 19 लोगों के पास मौजूद हथियारों का ब्योरा मांगा है। इसमें बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया और कई अन्य बाहुबली नेता शामिल हैं। उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से और जिला अधिकारी और समस्त पुलिस अधीक्षकों से आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों की बाहुबलियों की लाइसेंस दिए जाने पर राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा है। 

बाहुबलियों को हथियार बांटने पर भड़का हाईकोर्ट, बृजभूषण सिंह से लेकर राजा भैया तक का ब्यौरा मांगा​
बाहुबलियों को हथियार बांटने पर भड़का हाईकोर्ट, बृजभूषण सिंह से लेकर राजा भैया तक का ब्यौरा मांगा​

कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह, रघुराज प्रताप सिंह, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, विनीत सिंह समेत 19 बाहुबलियों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके पास मौजूद हथियारों का ब्यौरा मांगा है।

बाहुबलियों को हथियार देने से जनता का विश्वास कम होता है कोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि शस्त्रों का खुलेआम प्रदर्शन सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने बुधवार को अपने आदेश में कहा, “आत्मरक्षा के नाम पर ये हथियार, वास्तविक सुरक्षा से कहीं अधिक धमकी के उपकरण बन जाते हैं, जो भय पैदा करते हैं। जिस समाज में सशस्त्र व्यक्ति प्रत्यक्ष बल प्रयोग और धमकियों के माध्यम से अपना वर्चस्व स्थापित करते हैं, वह समाज अधिक स्वतंत्र या शांतिपूर्ण नहीं बनता, बल्कि इससे जनता का विश्वास कम होता है।” 

धमकाने का उपकरण बनते हैं हथियार

उच्च न्यायालय ने कहा, “इस अदालत का प्रथम दृष्टया विचार है कि हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन अक्सर सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ता है और आम लोगों में भय एवं असुरक्षा की भावना पैदा करता है। यद्यपि खुले में हथियार ले जाना कभीकभी न्यायोचित हो सकता है, लेकिन आत्मरक्षा के नाम पर ये हथियार धमकाने का उपकरण बन जाते हैं।” 

हाईकोर्ट ने इन लोगों की जानकारी मांगी

रघुराज प्रताप सिंह, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजित सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील सिंह, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सन्नी सिंह, छुन्नू सिंह, डाक्टर उदय भान सिंह। 

गन कल्चर पर सख्त हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा, “बहस के दौरान ऐसा महसूस किया गया कि इस अदालत के समक्ष इसी तरह के मामले लंबित हैं, जिनमें सार्वजनिक और राजनैतिक जीवन में शामिल व्यक्तियों से जुड़े लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। एक तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए और जानकारी आवश्यक है।” कोर्ट ने कहा कि यह मामला 26 मई को नए सिरे से सूचीबद्ध किया जाएगा। कोर्ट ने इससे पहले उत्तर प्रदेश में बढ़ती बंदूक संस्कृति पर सख्त रुख अपनाते हुए जारी शस्त्र लाइसेंसों के समग्र आंकड़े मांगे थे।