हिमाचली खबर: कानपुर में आईटीबीपी के एक जवान की मां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अस्पताल की कथित लापरवाही को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक और पुलिस स्तर तक पहुंच गया है। मामले में पहले अस्पताल को राहत मिलने के बाद अब सवाल और तेज हो गए हैं। इसी को लेकर आईटीबीपी के जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों और कमांडर के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

बताया जा रहा है कि आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां को इलाज के लिए कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उनका हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे और मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
क्लीन चिट मिलने के बाद बढ़ा विवाद
इस पूरे प्रकरण को लेकर पहले जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा गया था। हालांकि, सीएमओ कार्यालय की ओर से अस्पताल को क्लीन चिट देने जैसी रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। आरोप लगाया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया गया, जिसके चलते पीड़ित पक्ष और आईटीबीपी जवानों में नाराजगी बढ़ गई। इसी नाराजगी के बीच बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवान अपने कमांडर के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी। जवानों ने कहा कि उन्हें जांच प्रक्रिया पर भरोसा तभी होगा जब पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से दोबारा जांच कराई जाएगी।
नई कमेटी का गठन
सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सीएमओ और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी बुलाया गया। पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा के लिए नई कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों तक भेजने और लखनऊ स्तर पर भी समीक्षा कराने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि नई जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन, चिकित्सा विभाग और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर उठे सवाल
वहीं दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पिछले कुछ समय से कई मामलों में उनकी कार्यशैली विवादों में रही है। अब इस मामले में अस्पताल को राहत देने वाली रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर सीएमओ की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल आईटीबीपी जवान अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे। अब सभी की नजर नई जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।



