हिमाचली खबर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को 66 विभूतियों को पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी. 25 जनवरी, 2026 को 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नाम का ऐलान हुआ था. इसके तहत पहले फेज में 66 हस्तियां सम्मानित होंगी. अन्य हस्तियों को दूसरे चरण में सम्मानित किया जाएगा. पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से एक है. इस सम्मान की शुरुआत 1954 में हुई थी. पहले पद्म पुरस्कार पाने वालों में सत्येंद्र नाथ बोस, नंदलाल बोस, जाकिर हुसैन, बालासाहेब गंगाधर खेर, वी. के. कृष्ण मेनन और जिग्मे दोरजी वांगचुक थे.

एक साथ 6 हस्तियों को यह सम्मान मिला था. भारत सरकार ने 1954 में दो नागरिक पुरस्कारों भारत रत्न और पद्म विभूषण की स्थापना की. तब पद्म विभूषण के तीन वर्ग थे, पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग. बाद में 8 जनवरी, 1955 को इनके नाम बदलकर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री किए गए.
कौन थीं पहला पद्म सम्मान वाली 6 विभूतियां?
1 सत्येंद्र नाथ बोस
सत्येंद्र नाथ बोस की गिनती देश के महान भौतिकशास्त्रियों में की जाती है. उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ मिलकर 1924 में ‘बोस आइंस्टीन सांख्यिकी’ का सिद्धांत दिया. उनके इसी योगदान के आधार पर बोसॉन कण का नामकरण किया गया.
सत्येंद्र नाथ बोस. फोटो: Facebook
वो कलकत्ता और ढाका विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक रहे और कांटम यांत्रिकी के क्षेत्र में काम किया. उन्हें ‘फेलो ऑफ द रॉयल सोसायटी’ की ओर से सम्मानित किया गया. सत्येंद्र नाथ बोस राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष रहे और आधुनिक भौतिकी की नींव रखी.
2 नंदलाल बोस
इन्हें आधुनिक भारतीय कला का पितामह कहा जाता है. अवनींद्रनाथ ठाकुर के शिष्य रहे नंदलाल बोस बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट के प्रमुख स्तंभ रहे. भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी कलाकृतियों से सजाने के साथ शांति निकेतन में कला भवन का प्रधानाचार्य बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी प्रशिक्षित किया.
नंदलाल बोस. फोटो: विकीपीडिया.
नंदलाल बोस की चित्रशैली में अजंता परंपरा और भारतीय लोककला का संगम देखने को मिलता था. महात्मा गांधी भी उनकी कला के प्रशंसक थे. उन्होंने हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन के लिए ऐतिहासिक पोस्टर बनाए और भारतीय कला को नई पहचान दिलाने लाने में उनकी भूमिका अहम रही.
3 जाकिर हुसैन
भारत के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक थे. वो यहां के दीर्घकालीन कुलपति रहे. उन्होंने बुनियादी शिक्षा को व्यावहारिक रूप दिया. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति होने के साथ बिहार के राज्यपाल और देश के उपराष्ट्रपति के तौर पर भी काम किया.
डॉ. जाकिर हुसैन. फोटो: Facebook
साल 1963 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. देश में शिक्षा के प्रसार और राष्ट्र निर्माण के समर्पण की भावना के लिए उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
4 बालासाहेब गंगाधर खेर
बंबई प्रांत के पहले मुख्यमंत्री बालासाहेब गंगाधर एक कुशल प्रशासक होने के साथ अधिवक्ता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी थे. उन्होंने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई और अंग्रेजों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की. उनकी लीडरशिप में बंबई प्रांत में कई विकास कार्य हुए.
बालासाहेब गंगाधर खेर.
यही नहीं वो आंध्र प्रदेश के पहले राज्यपाल बने. मराठी और हिंदी साहित्य से उनका विशेष लगाव था्. सामाजिक सुधारों को प्रशासनिक प्राथमिकता और भारतीय संघवाद को सुदृढ़ करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा.
5 वी. के. कृष्ण मेनन
वेंगलिल कृष्णन कृष्ण मेनन देश के जानेमाने राजनयिकों में से एक थे. उन्होंने कश्मीर और गोवा के मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में पक्ष रखा. उनकी गिनती नेहरू के विश्वासपात्र और रूप में होती थी और बतौर रक्षामंत्री सेना को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाई.
वेंगलिल कृष्णन कृष्ण मेनन. फोटो: Wikipedia
वेंगलिल कृष्णन कृष्ण मेनन इंग्लैंड में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख समर्थक रहे और इंडिया लीग की स्थापना की. 1962 के भारतचीन युद्ध के बाद उन्हें रक्षामंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा. वे वामपंथी विचारों के समर्थक और एक कुशल वक्ता थे.
जिग्मे दोरजी वांगचुक.
6 जिग्मे दोरजी वांगचुक
भूटान के तृतीय द्रुक ग्यालपो जिग्मे दोरजी वांगचुक को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें “आधुनिक भूटान का जनक” कहते हैं. उन्होंने दासप्रथा को खत्म किया. भूमि सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना की. भारत और भूटान के बीच मित्रता को नई ऊंचाइयां दीं. संयुक्त राष्ट्र में भूटान की सदस्यता उनके कार्यकाल में हुई. भारतभूटान संबंधों को मजबूत आधार देने के कारण उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया.



