हिमाचली खबर: भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान के कारण हाई ब्लड प्रेशर,डायबिटीज और पोषण की कमी जैसी साइलेंट किलर समस्याएं आम हो गई हैं। इन बीमारियों के लक्षण शुरुआत में आसानी से दिखाई नहीं देते, जब दिखाई देते हैं तब तक बॉडी को कई तरह का नुकसान पहुंच चुका होता है। बॉडी को हेल्दी रखने के लिए और जरूरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने पोषक तत्वों से भरपूर सुपर फूड्स को डाइट में शामिल करने की सलाह दी है। मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियां जिसे मेडिकल साइंस और न्यूट्रिशनिस्ट्स मल्टीविटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना कहते हैं। आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक अगर समय रहते खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार कर लिया जाए, तो साइलेंट किलर डिजीज पर काबू पाया जा सकता है। आयुर्वेदिक नुस्खे अचानक पनपने वाली बीमारियों को कंट्रोल करते हैं और बॉडी को हेल्दी रखते हैं। 

क्रोनिक सूजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फ्री रेडिकल्स से बचाव करती हैं मोरिंगा की पत्तियां, पोषक तत्वों की है भरमार, एक्सपर्ट से जानिए फायदे​
क्रोनिक सूजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फ्री रेडिकल्स से बचाव करती हैं मोरिंगा की पत्तियां, पोषक तत्वों की है भरमार, एक्सपर्ट से जानिए फायदे​

सहजन की पत्तियों को सुपरफूड क्यों कहते हैं?

मोरिंगा की पत्तियां एक सुपरफूड हैं जिन्हें नेचुरल मल्टीविटामिन कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व एक साथ पाए जाते हैं। इसमें विटामिन A, C, E, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होता हैं। इसके अलावा इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं। मोरिंगा की पत्तियां शरीर को जरूरी पोषण देने के साथसाथ इम्यूनिटी को भी मजबूत करती हैं। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर ये पत्तियां शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। आयुर्वेद में मोरिंगा को रसायन माना गया है, यानी ऐसा पौधा जो शरीर को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है। मोरिंगा की पत्तियों में प्रोटीन, आयरन, विटामिन A, विटामिन C, मैग्नीशियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बॉडी के लिए जरूरी हैं।

सहजन की पत्तियों का सेवन करने के फायदे

ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार

विशेषज्ञों के मुताबिक मोरिंगा लीव्स में कुछ ऐसे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं जो ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट कर सकते हैं। यह प्रीडायबिटीज, बॉर्डर लाइन शुगर या फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। कुछ रिसर्च में पाया गया है कि मोरिंगा में मौजूद प्लांट कंपाउंड ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में सहायक हो सकते हैं। डायबिटीज मरीज रोज इन पत्तियों का सेवन चबाचबाकर करें तो आसानी से ब्लड शुगर को नॉर्मल कर सकते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ मोरिंगा लेने से डायबिटीज कंट्रोल नहीं होती, इसके साथ लाइफस्टाइल सुधारना भी जरूरी है।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए लाभकारी

इसमें मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इनका सेवन करने से हाई बीपी को नेचुरल तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

शरीर को मिलता है बेहतर न्यूट्रिशन

आजकल अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स और खराब खानपान के कारण शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में मोरिंगा लीव्स शरीर को जरूरी न्यूट्रिएंट्स देने में मदद कर सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इससे थकान, कमजोरी, लो इम्यूनिटी और मसल वीकनेस जैसी समस्याओं में मदद मिल सकती है।

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मददगार

मोरिंगा में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज करने में मदद कर सकते हैं। इससे शरीर के अंदर होने वाले डैमेज की गति को कम किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह अर्ली एजिंग, जॉइंट डैमेज और नसों की कमजोरी जैसी समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।

इन्फ्लेमेशन कंट्रोल करने में मदद

मोरिंगा में मौजूद तत्व शरीर के इंफ्लेमेटरी पाथवे को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे शरीर का इंटरनल एनवायरमेंट बेहतर रहता है और हार्ट डिजीज, जॉइंट पेन और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।

हार्ट हेल्थ को मिलती है सपोर्ट

विशेषज्ञों के अनुसार मोरिंगा कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने और LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को मैनेज करने में मदद कर सकता है। खासकर 30 साल से अधिक उम्र के लोगों, स्ट्रेस में रहने वालों और हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों के लिए यह फायदेमंद माना जाता है।

मोरिंगा लेने का सही तरीका क्या है?

मार्केट में मोरिंगा कैप्सूल, टैबलेट और पाउडर के रूप में उपलब्ध है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे नेचुरल और कम प्रोसेस्ड फॉर्म में लेना ज्यादा बेहतर हो सकता है।
मोरिंगा पाउडर को गुनगुने पानी, दही, छाछ, जूस या सलाद के साथ लिया जा सकता है। आमतौर पर रोजाना एक चौथाई से आधा चम्मच तक इसकी मात्रा पर्याप्त मानी जाती है। हालांकि किसी भी हर्बल सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर आपकी उम्र 30 साल से ज्यादा है, आप लगातार तनाव में रहते हैं, आपकी शुगर या कोलेस्ट्रॉल बॉर्डरलाइन रहता है या परिवार में हार्ट डिजीज और बीपी की हिस्ट्री है, तो आपको अपने लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एक्सपर्ट के मुताबिक कोई भी सुपरफूड तब तक पूरी तरह असरदार नहीं हो सकता जब तक खानपान, नींद, एक्सरसाइज और तनाव को सही तरीके से मैनेज न किया जाए। नियमित व्यायाम, हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट के साथ मोरिंगा को डेली रूटीन का हिस्सा बनाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी सप्लीमेंट, हर्बल प्रोडक्ट या हेल्थ रूटीन को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।