यह मामला अप्रैल 2024 का है, जब सऊदी अरब पर आरोप लगा था कि उसने अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम से कुरान की कुछ आयतों को हटा दिया है। उस समय इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम दुनिया में काफी चर्चा हुई थी और यमन के हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इसका खुलकर विरोध किया था।

अब्दुल मलिक अल-हूती ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने और यहूदियों को नाराज होने से बचाने के लिए पाठ्यपुस्तकों से कुछ आयतें हटा रहा है। उनके अनुसार, हटाई गई आयतों में ऐसी बातें थीं जो यहूदियों द्वारा किए गए अपराधों का उल्लेख करती थीं।

हूती नेता ने यह भी दावा किया था कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इसी दिशा में काम कर रहा है और दोनों देश ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो इजरायल के प्रति सकारात्मक सोच रखे। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय रही थी।

उस समय यह विवाद ऐसे दौर में सामने आया था जब इजरायल, ईरान और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव चरम पर था। हूती संगठन गाजा युद्ध में हमास का समर्थन कर रहा था और सऊदी अरब के रुख को लेकर लगातार आलोचना कर रहा था।

यह खबर उस समय काफी चर्चा में रही थी और सऊदी अरब की शिक्षा नीतियों तथा इजरायल के साथ उसके संबंधों को लेकर कई सवाल उठे थे।