हिमाचली खबर: Rudraksh Mala Nyam: रुद्राक्ष है तो केवल एक बीज, लेकिन सनातन धर्म में इसकी बहुत ज्यादा अहमियत बताई गई है। शिव का आशीर्वाद हमेशा बना रहे, इस कामना में शिव भक्त रुद्राक्ष को धारण करते हैं। कई लोग किसी न किसी रूप में रुद्राक्ष को धारण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं रुद्राक्ष पहनने की भी एक वैदिक विधि है। अगर इसे धारण करते हुए नियमों का पालन न किया जाए, तो महादेव का यह मनका भी शुभ फल नहीं देता। जानिए रुद्राक्ष माला पहनने के नियम क्या हैं।

बहुत ही पवित्र माने जाने वाले रुद्राक्ष का उत्पत्ति महादेव के आंसुओं से हुई है। रुद्राक्ष शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है: रुद्र और अक्ष , रुद्राक्ष का अर्थ शिव की आंख या शिव के आंसू हैं। रुद्राक्ष के दाने रुद्राक्ष के पौधे के बीज होते हैं, जिसे सभी शोक को दूर करके सुखसौभाग्य दिलाने वाला माना गया है।
ऐसे अभिमंत्रित करें रुद्राक्ष की माला
- रुद्राक्ष की माला खरीदते समय अच्छी तरह से चेक कर लें। खंडित या फिर 108 दाने से कम वाली माला न खरीदना शुभ नहीं माना जाता है।
- रुद्राक्ष माला को किसी भी मास के शुक्लपक्ष के सोमवार को गंगाजल से धो लें और फिर पंचगव्य में डुबाएं।
- इसके बाद एक बार फिर इस माला को गंगाजल या शुद्ध जल से धोकर एक साफ सुथरे सफेद कपड़े से पोंछ लें।
- अब किसी एक पात्र में पीले या लाल रंग का आसन बिछाएं और रुद्राक्ष की माला इसमें रख दें।
- फिर शिव जी का ध्यान करते हुए माला को शिवलिंग पर अर्पित करते हुए धूपदीप, अक्षत, फूल आदि से पूजा करें।
- अब मन में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए रुद्राक्ष की माला के हर मनके को स्पर्श करें।
- पूजा के बाद रुद्राक्ष की माला को गले में धारण करना चाहते हैं तो महादेव का प्रसाद मानते हुए इसे पहन लें।
- रुद्राक्ष माला की पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी नियमों का पालन जरूर करें।
- वहीं, अगर आप अभिमंत्रित की गई रुद्राक्ष माला को जप माला के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसे चांदी के डिब्बी में रख दें और हर दिन या फिर महीने में एक बार उसमें इत्र की 2 बूंद डालें और माला की पूजा के बाद इच्छित मंत्र का जप करें।
रुद्राक्ष की माला को प्रयोग करने के नियम
- रुद्राक्ष की माला को गले में धारण करने के लिए लाल या पीले रंग के धागे में बनवाकर ही पहनें।
- माला या ब्रेसलेट के तौर पर पहनने के लिए भूलकर भी रुद्राक्ष को काले धागे में पिरोए।
- अगर आप रुद्राक्ष माला को चांदी या सोने से कवर करते हैं तो यह ध्यान रखें कि उसमें इतना स्थान हो कि रुद्राक्ष आपकी त्वचा को स्पर्श करें।
- अपवित्र अवस्था में भूलकर भी रुद्राक्ष न धारण करें, जैसे अंतिम संस्कार या शौच आदि के लिए जाने से समय रुद्राक्ष उतार कर पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए।
- रुद्राक्ष की माला को जप माला के रूप में उपयोग करते हैं तो उसे गोमुखी में डालकर दाहिने हाथ के अंगूठे और मध्यमा या फिर अनामिका उंगली का प्रयोग करते हुए जाप करें।
- भगवान शिव की पूजा में कभी भी पहनी हुई रुद्राक्ष माला प्रयोग में नहीं लाना चाहिए। दूसरों की पहनी हुई माला खुद भी कभी न पहनें।
- रुद्राक्ष की माला को सीधे जमीन पर न रखें, इसे उतारना पड़े तो हमेशा किसी पवित्र स्थान पर ही रखें।
लाभ: मान्यता है कि सही रुद्राक्ष धारण करने से उससे जुड़े ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने और उसके नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। हिंदू धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि रुद्राक्ष धारण करने वाले जातकों पर हमेशा महादेव की विशेष कृपा रहती है।



